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ताज महल में कृत्रिम रोशनी करना सही नहीं

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ताज महल में कृत्रिम रोशनी करना सही नहीं

नयी दिल्ली : शीर्ष पुरातत्वविदों ने यह कहते हुए ताजमहल में कृत्रिम रोशनी किये जाने पर आपत्ति जतायी है कि ताजमहल ‘ऐसा स्मारक नहीं है जिसके साथ प्रयोग किया जाए.’ उन्होंने कहा कि रोशनी के कारण आकर्षित होने वाले कीट ताजमहल की संगमरमर की सतह पर मलत्याग करके उसे नुकसान पहुंचाते हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार 17वीं सदी के विश्व विरासत स्थल पर कुछ महीनों पहले सुरक्षा प्रकाश स्तम्भ लगाये गये थे ताकि वहां रोशनी रह सके और पर्यटकों को रात में भी आने के लिए आकर्षित किया जा सके. अधीक्षण पुरातत्वविद (विज्ञान शाखा) एम के भटनागर ने कहा, ‘संगमरमर से बने इस स्मारक में प्रत्यक्ष रोशनी करने से कीटों की एक बडी समस्या पैदा हो गयी है. ये कीट प्रकाशित हिस्से के फर्श और दीवारों पर बैठते हैं और इसकी सतह पर मलत्याग करते हैं जिससे इस पर एक रंग छूट जाता है और इससे वास्तुकला के इस आदर्श स्मारक की सुंदरता को नुकसान होता है.’

भटनागर ने आगरा से फोन पर बातचीत के दौरान कहा, ‘हमने (विज्ञान शाखा) एएसआई के महानिदेशक, विज्ञान शाखा (एएसआई) के निदेशक, एएसआई आगरा मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद और सीआईएसएफ को पत्र भेजकर लाइट तत्काल बंद करने का अनुरोध किया है.’ एएसआई अतिरिक्त महानिदेशक बी आर मणि ने विश्व प्रसिद्ध विरासत स्थल पर कृत्रिम रोशनी किये जाने पर हैरानी जताते हुए कहा, ‘पहली बात तो यह है कि ताज महल को कृत्रिम रोशनी की आवश्यकता नहीं है. यह संगमरमर से बना है और प्राकृतिक रोशनी में इसकी खूबसूरती को देखा जा सकता है. कृत्रिम रौशनी से इसे प्रकाशमान करना पूरी तरह मूर्खता है. इससे कीट आकर्षित होते हैं. यदि सरकार को लगता है कि लाइट लगाने से अधिक पर्यटक आकर्षित होंगे तो मुझे बहुत खेद के साथ कहना पड रहा है कि ताजमहल ऐसा स्मारक नहीं है जिसके साथ प्रयोग किया जा सके.’

उन्होंने कहा, ‘स्मारक पर रोशनी करना और रात में अधिक पर्यटकों को आकर्षित करना सुरक्षा को संभावित खतरा हो सकता है. पर्यटक रात में इसकी खूबसूरती निहारने के लिए कभी कभार आ सकते हैं. लेकिन नियमित आधार पर नहीं.’ एएसआई के सूत्रों ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय पर ताजमहल में लाइटें लगाने का ‘दबाव था’ जबकि पूर्व में किये गये अध्ययनों में ऐसा नहीं करने की सलाह दी गयी है.

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