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प्रियंका गांधी को अपना उत्‍तराधिकारी बनाना चाहती थीं इंदिरा गांधी

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प्रियंका गांधी को अपना उत्‍तराधिकारी बनाना चाहती थीं इंदिरा गांधी

नयी दिल्ली : राजीव गांधी और सोनिया की बेटी प्रियंका भले ही आज राजनीति से दूर हैं, लेकिन उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाना चाहती थीं. इस बात का खुलासा गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाल कांग्रेस नेता एमएल फोतेदार ने अपनी किताब ‘चिनार लीव्स’ में किया है. फोतेदार की इस किताब का विमोचन 30 अक्तूबर को होना है. लेकिन यह किताब पहले ही चर्चा में आ गयी.

फोतेदार ने अपनी किताब में दावा किया है कि इंदिरा गांधी को प्रियंका में अपना अक्स दिखता था, यही कारण था कि वे प्रियंका को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहती थीं. हालांकि इंदिरा की इस मंशा की जानकारी जब सोनिया गांधी को हुई तो वह बहुत परेशान हो गयीं थीं.
फोतेदार ने अपनी किताब में लिखा है कि इंदिरा गांधी कश्मीर के एक मंदिर में दर्शन के लिए गयी थीं. उसी वक्त उन्होंने कुछ ऐसा देखा था, जिससे उन्हें अपनी मृत्यु निकट होने का आभास हो गया था. मंदिर से लौटने के बाद उन्होंने प्रियंका को अपना उत्तराधिकारी बनाने की बात की थी. उन्हें ऐसा लगता था कि प्रियंका में एक नेता होने के तमाम गुण हैं और उनका राजनीतिक कैरियर सफल रहेगा.
इस किताब में फोतेदार ने गांधी परिवार से जुड़ी कई बातों का जिक्र किया है. उन्होंने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के जीवन से जुड़े कई पहलुओं की भी चर्चा की है.उन्होंने दावा किया है कि सोनिया गांधी ने 2004 में प्रधानमंत्री का पद आत्मा की आवाज पर नहीं छोड़ा, बल्कि उनपर गांधी परिवार का दबाव था.चूंकि इस किताब में गांधी परिवार का जिक्र है, इसलिए यह किताब विमोचन से पहले ही चर्चित हो गयी है.
गौरतलब है कि कांग्रेस की लोकसभा चुनाव में हार के बाद कई कांग्रेसियों ने यह मांग की कि पा र्टी की कमान राहुल गांधी को नहीं प्रियंका गांधी को सौंपी जाये, लेकिन सोनिया ने इस सलाह को तरजीह नहीं दी है. प्रियंका का राजनीतिक कैरियर सिर्फ इतने में ही सिमटा है कि वह अपनी मां और भाई के निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार करने जाती हैं.
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