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गोवध को खुला समर्थन व्यावहारिक नहीं: राजनाथ सिंह

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गोवध को खुला समर्थन व्यावहारिक नहीं: राजनाथ सिंह

नयी दिल्ली : गोरक्षा पर जोर देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि मुगलों तक को पता था कि यदि उन्हेंशासन करना है तो गोवध को खुला समर्थन व्यावहारिक नहीं होगा जबकि ब्रिटिश लोग इस पहलू को समझने में विफल रहे. वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि गृह मंत्री के रूप मेंउन्होंने सुनिश्चित किया है कि बांग्लादेश को होने वाली मवेशियोंकी तस्करी रुके. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने इसके लिए लगातार प्रयास किये.

राजनाथ ने कहा, मेरे पास मुगल शासकों के बारे में जो भी अल्प जानकारी है . मैं कह सकता हूं कि मुगल शासकों को ये बात पता थी. वो समझते थे कि गोवध कर और गोवध को खुला समर्थन कर, वे लंबे समय तक शासन नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, यहां तक कि बाबर ने भी अपनी वसीयत में लिखा कि हम एक बार में दो चीजें नहीं कर सकते. या तो जनता के दिलों पर राज करो या गोमांस खाओ. केवल एक बात हो सकती है . साथ- साथ ये दोनोंकाम नहीं हो सकते. वह राष्ट्रीय गोधन महासंघ द्वारा कृषि मंत्रालय के सहयोग से आयोजित गोरक्षा पर एक सम्मेलन में बोल रहे थे.

राजनाथ सिंह ने कहा, जब ब्रिटिश भारत आये, भारतीय परंपरा का जिस तरह आदर होना चाहिए था … वैसा नहीं हुआ. वस्तुत: ये और खराब हो गयी. आजादी की पहली लडाई (1857) की वजहों में से एक मुख्य वजह गाय की चर्बी थी, जो कारतूस में इस्तेमाल होती थी. इससे गाय के प्रति जनता की आस्था का पता चलता है. यह पूछने पर कि क्या केंद्र गोवध पर प्रतिबंध लगायेगा, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि इस पर राज्य सरकारों को विचार करना चाहिए.

राजनाथ सिंह ने कहा कि गाय से जुड़े सभी वैज्ञानिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं पर भलीभांति विचार करने की आवश्यकता है.

गृह मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद सरकार की ओर से गोरक्षा के लिए किये गये उपायों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बीएसएफ कर्मियों के प्रयासों की बदौलत बांग्लादेश को मवेशियों की तस्करी कम हुई है.उन्होंने कहा, जब मैंने कार्यभार संभाला, महीने भर के भीतर मैंने तय किया कि मैं गाय की तस्करी का भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौके पर जाकर जायजा लूंगा. तस्करी रोकना अत्यंत मुश्किल था .

नदियां, दुर्गम जगह. आपको तस्करों से लडना है. राजनाथ ने कहा कि वह बीएसएफ जवानों के पास गये और कहा कि जब हम तस्करी रोक लें तभी इस बैठक को सफल माना जाएगा. सरकार ने गोरक्षा के लिए 500 करोड रुपये का आवंटन किया. भारतीय नस्ल की गायों पर अनुसंधान के लिए दो केंद्र बनाये गये हैं.

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