नागपुर : याकूब मेमन आज यहां फांसी के फंदे से लटकाए जाने के लिए तय समय से तीन घंटे पहले जगा था और उसे यह सजा देने का काम बगैर किसी अडचन के पूरा हो गया. नागपुर केंद्रीय कारागार में उसे फांसी देने की तैयारियां 1,050 किलोमीटर दूर दिल्ली में उच्चतम न्यायालय के तीन सदस्यीय पीठ के अपना आदेश सुबह चार बजकर 50 मिनट पर सुनाए जाने से काफी पहले से चल रही थी. हालांकि, शीर्ष न्यायालय के आदेश के साथ ही याकूब को अपने 53 वें जन्म दिन के दिन राहत मिलने की आखिरी आस भी खत्म हो गई.
अदालत कक्ष में तडके ही शीर्ष न्यायालय के आदेश सुनाए जाने के दो घंटे से कुछ ही देर बाद पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट याकूब को जेल में प्रक्रियाओं के पूरी होने पर सुबह सात बजे फांसी दे दी गई. याकूब के भाई सुलेमान और चचेरे भाई उस्मान कल यहां इस उम्मीद के साथ पहुंचे थे कि आखिरी क्षण की कानूनी लडाई में वह फांसी के तख्ते से बच जाएगा. सिर्फ ये लोग ही उसके परिवार के सदस्य के तौर पर उसे बीती रात नम आंखों से अंतिम विदाई देने आए थे जिसके बाद वे अपने होटल लौट गए जहां वे ठहरे हुए थे.
