रियल एस्टेट विधेयक में उपभोक्ता हितों की रक्षा के हों समुचित प्रबंध : संसद समिति

नयी दिल्ली: रियल एस्टेट विधेयक संबंधी राज्यसभा की प्रवर समिति ने अपनी रिपोर्ट आज सौंप दी जिसमें उपभोक्ताओं की चिंता को साझा करते हुए कहा गया है कि प्रस्तावित विधेयक ऐसा होना चाहिए जिसमें उपभोक्ताओं को दिग्भ्रमित करने या उन्हें धोखा देने के लिए प्रवर्तकों के पास कोई गुंजाइश नहीं हो.... इसके साथ ही समिति […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 30, 2015 5:00 PM

नयी दिल्ली: रियल एस्टेट विधेयक संबंधी राज्यसभा की प्रवर समिति ने अपनी रिपोर्ट आज सौंप दी जिसमें उपभोक्ताओं की चिंता को साझा करते हुए कहा गया है कि प्रस्तावित विधेयक ऐसा होना चाहिए जिसमें उपभोक्ताओं को दिग्भ्रमित करने या उन्हें धोखा देने के लिए प्रवर्तकों के पास कोई गुंजाइश नहीं हो.

इसके साथ ही समिति ने विधेयक में संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि वह महसूस करती है कि रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास में प्रवर्तकों की जिम्मेदारी है. अन्य कारोबारों की तरह यहां भी अच्छे और बुरे प्रवर्तक हैं तथा सभी प्रवर्तकों के साथ एक जैसा व्यवहार करना उचित नहीं होगा.

भूसंपदा (विनियमन और विकास) विधेयक 2013 संबंधी राज्यसभा की प्रवर समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘ समिति उपभोक्ताओं की चिंता को साझा करती है और इससे सहमत है कि उपभोक्ता उन ‘रात्रि आपरेटरों’ के भाग जाने के कारण प्रभावित होते हैं जो उनको धोखा देकर कठिन मेहनत से अर्जित उनके धन को ठग लेते हैं.’’ भाजपा सदस्य अनिल माधव दवे की अध्यक्षता वाली इस समिति की रिपोर्ट आज उच्च सदन में पेश की गयी. इसमें कहा गया है कि समिति उन उपभोक्ताओं के लिए अपनी पूरी सहानुभूति व्यक्त करती है जिन्होंने अपना धन खो दिया या जो न्याय के लिए अदालतों में अपने मामले लड रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति पूरी तरह से उपभोक्ताओं के हित के समर्थन में है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि विधेयक ऐसा होना चाहिए कि उपभोक्ताओं को दिग्भ्रमित करके या धोखा देने की खातिर प्रवर्तकों के लिए तनिक भी गुंजाइश नहीं हो. उसने कहा कि समिति यह महसूस करती है कि रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास में प्रवर्तकों की बडी जिम्मेदारी है. किसी अन्य कारोबार की तरह यहां भी अच्छे और बुरे प्रवर्तक हैं. इसलिए सभी प्रवर्तकों के साथ एकसमान व्यवहार करना उचित नहीं होगा.

समिति ने कहा कि वह यह भी महसूस करती है कि अपने सभी नागरिकों को आश्रय और आवास प्रदान करने के लिए विभिन्न सरकारें लगातार प्रयासरत रहीं हैं. आज की सरकार का लक्ष्य 2022 तक सभी के लिए आवास का है और वह नये जोर के साथ काम कर रही है. लेकिन इस कार्य को निजी आपरेटरों की मदद के बिना पूरा नहीं किया जा सकता. इसे ध्यान में रखते हुए समिति को यह भी सुनिश्चित करना है कि अभीष्ट लक्ष्य की प्राप्ति हेतु इस क्षेत्र में पर्याप्त विकास हो.

कुमारी शैलजा, शांताराम नाइक, एमवी राजीव गौडा, नरेश अग्रवाल, ए डब्ल्यू रबि बर्नार्ड, रीताब्रता बनर्जी जैसे समिति के कुछ सदस्यों ने असहमति नोट भी दिया.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि साथ ही यह कानून ऐसा नहीं होना चाहिए जो इस क्षेत्र में नवेश को समाप्त कर दे. क्योंकि लाखों लोग इस क्षेत्र की गतिविधियों से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं. समिति इस बात को दोहराती है कि इस क्षेत्र का विकास उपभोक्ताओं की कीमत पर नहीं हो सकता। वास्तव में समिति, अच्छे उपभोक्ता और अच्छे प्रवर्तक की सहायता करने की मांग करती है. उसके अनुसार समिति इस विधेयक में संतुलन लाने की मांग करती है. इसके साथ ही समिति ने विज्ञापन, विक्रय की सहमति, अपार्टमेंट, कार्पेट एरिया आदि को फिर से परिभाषित किए जाने पर भी बल दिया.