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Home National आइपीएस अमिताभ ठाकुर का निलंबन, मुलायम सिंह यादव का पीएम मेटेरियल होना और भारतीय लोकतंत्र

आइपीएस अमिताभ ठाकुर का निलंबन, मुलायम सिंह यादव का पीएम मेटेरियल होना और भारतीय लोकतंत्र

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आइपीएस अमिताभ ठाकुर का निलंबन, मुलायम सिंह यादव का पीएम मेटेरियल होना और भारतीय लोकतंत्र

अज्ञात

मुद्दों के लिए लडने वाले चर्चित आइपीएस अमिताभ ठाकुर को धमकी देने की खबर को मुलायम सिंह यादव के सुपुत्र(पार्टी में नंबर दो स्थान पर भी)और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दूसरे तरीके से स्वीकार कर लिया. उन्होंने कहा कि नेताजी क्या गलती करने वालों को डांट नहीं सकते? हमलोगों को भी ऐसे ही डांटते हैं. अखिलेश के सोमवार के दिन के इस बयान के बाद मंगलवार की रात आइपीएस अमिताभ ठाकुर को सस्पेंड कर दिया गया. इस संबंध में जारी आदेश में कहा गया है कि सरकार विरोधी रुख अख्तियार करने, उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश की अवहेलना, कर्तव्य निर्वहन में कोताही व अनुशासनहीनता के कारण उन्हें सस्पेंड किया गया है.
आइपीएस को सस्पेंड करने पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने मीडिया में बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि जो अधिकारी जिम्मेवारी का निर्वहन नहीं करते हैं, उनके खिलाफ तो कार्रवाई की ही जायेगी.
आइपीएस अमिताभ ठाकुर का रियलिस्टिक अंदाज
आइपीएस अमिताभ ठाकुर यथार्थवादी हैं और भविष्य का सटिक अनुमान भी लगा लेते हैं. उन्होंने स्वयं को सस्पेंड किये जाने पर टिप्पणी की : मुझे आश्चर्य नहीं है हो रहा है कि अखिलेश यादव सरकार ने मेरे खिलाफ ऐसा स्टैंड लिया है, क्योंकि मुझे इस बात की आशंका पहले से ही थी. ठाकुर सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह सेमिलने दिल्ली पहुंचे थे, पर उनकी अनुपस्थिति में उन्होंने गृहमंत्रालय को एडिशनल सेक्रेटरी के सामने अपनी बात रखी और मुलायम सिंह की धमकी, खुद पर लगे बलात्कार के आरोप व अन्य संबद्ध मामलों की सीबीआइ जांच की मांग की. उल्लेखनीय है कि अमिताभ ठाकुर पर एक महिला ने बलात्कार का आरोप उनके द्वारा मुलायम सिंह धमकी मामले का खुलासा किये जाने के कुछ ही देर बाद लगाया. इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. मुलायम सिंह आइपीएस को जिस जसराना मामले की याद दिलाकर चेता रहे थे, उसमें अमिताभ ठाकुर से कुछ लोगों ने पकड कर बदसलूकी की थी. नेताजी ने आइपीएस को इससे भी बुरा होने की चेतावनी दी थी. वहीं अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि इस मामले में उन्होंने मुलायम सिंह यादव से शिकायत की थी, पर उन्होंने केस दर्ज करवाने से उन्हें मना कर दिया था.
पीएम मेटेरियल हैं मुलायम सिंह यादव
मुलायम सिंह यादव देश के वरिष्ठतम नेताओं में शुमार किये जाते हैं. समाजवादी धडे ने हाल में उनकी इस वरिष्ठता को अपने अघोषित दल का अध्यक्ष बनाकर भी सम्मानित किया. मुलायम सिंह यादव देश के सबसे बडे व राजनीतिक रूप से अहम प्रदेश उत्तरप्रदेश के कई बार मुख्यमंत्री रहे हैं. वे 1996 में लालू प्रसाद के विरोध के कारण प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गये थे. इसका मलाल मुलायम सिंह यादव को है. संसद में मुलायम सिंह यादव की एक विशिष्ट हैसियत है. ऐसे में उनसे देश-समाज को उम्मीदें भी काफी अधिक हैं. इन सब के बीच जब वे आइपीएस अमिताभ ठाकुर को फोन कर चेतावनी देते हैं और उसके बाद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जिस पर लोगों की जान माल की सुरक्षा की जिम्मेवारी है, उसे कहते हैं कि मैं पटना गया था, तो आपके घर वालों ने कहा था कि यह हमारा बच्चा है, इसे आप देखते रहिएगा, ख्याल रखिएगा. तो क्या यह बयान यह इंगित करता है कि नेताजी की स्पष्ट बहुमत वाली सरकार के शासन में उत्तरप्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा का आला अफसर भी सुरक्षित नहीं है. और अगर ऐसा है, तो फिर आमलोगों की सुरक्षा कैसे होगी? अमिताभ ठाकुर द्वारा मुलायम सिंह यादव पर लगाये गये आरोप ने भी उनकेपीएम मैटेरियल की छवि पर तो सवाल उठा ही दिया है.
मोर्चे पर सक्रिय हैं आइपीएस अमिताभ की पत्नी नूतन ठाकुर
नूतन ठाकुर एक चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता हैं. आरटीआइ सहित कई सारे मु्ददों को लेकर वे लंबे समय से संघर्ष करती रहीं हैं. उन्होंने ही अपने पति को मुलायम सिंह यादव द्वारा किये गये फोन कॉल को टेप किया था. वे फेसबुक पर भी जस्टिस फॉर आइपीएस अमिताभ ठाकुर नाम से पेज बनाकर अभियान चला रही हैं.
उन्होंने कहा है कि अमिताभ ठाकुर के निलंबन में कोई आश्चर्य नहीं है. उन्होंने कहा है कि जब उनका दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज हो सकता है, तो फिर निलंबन कोई बडी बात नहीं है. उन्होंने भी अपने पति की सुरक्षा की गुहार लगायी है. उन्होंने कहा है कि उनके पति ने अपनी नौकरी के दौरान अबतक कोई गलत काम नहीं किया है. नूतन ठाकुर ने पूरे मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही है. वहीं, अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि जन मुद्दों को उठाने के कारण हमेशा उन्हें धमकियां मिला करती हैं. उन्होंने मुलायम के खिलाफ लखनउ के हजरतगंज थाने में मामला दर्ज कराया है.
भारतीय लोकतंत्र और राजनेताओं की अपार ताकत
भारतीय लोकतंत्र में जनसमर्थन के माध्यम से नेताओं को जो प्रबल बहुमत मिलता है, उससे कई बार नेताओं को यह गलतफहमी हो जाती है कि यह जनसमर्थन उन्हें अपना एजेंडा चलाने व अपनी मनमर्जी करने की इजाजत भी देता है. प्रबल जनसमर्थन पाने वाले कई राजनेता अपने इलाके में माई-बाप की भावभंगिमा में लोगों के साथ व्यवहार करते हैं. लेकिन, वहीं प्रबल जनसमर्थन छिज जाता है, तब उन्हें अहसास होता है कि उनके पास तो अपनी कोई ताकत ही नहीं है. ऐसे कई उदाहरण इस देश की राजनीति में मौजूद हैं और आने वाले समय में कई कडियां इसमें जुटने भी वाली हैं.
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