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Home National Video: 4 दिन जंगल में सिर्फ 500ml पानी के सहारे जिंदा रही शारन्या

Video: 4 दिन जंगल में सिर्फ 500ml पानी के सहारे जिंदा रही शारन्या

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Video: 4 दिन जंगल में सिर्फ 500ml पानी के सहारे जिंदा रही शारन्या
सर्च टीम के साथ शारन्या (Photo: X)

Video : कोझिकोड की आईटी प्रोफेशनल शारन्या 2 अप्रैल को अपने ट्रेकिंग ग्रुप से अलग हो गई थीं. वह कोडगु की सबसे ऊंची चोटी तडियंडमोल से नीचे उतर रही थीं, ठीक इसी दौरान ये घटना हो गई. इसके बाद वह घने जंगल, खराब मौसम और अनजान रास्तों में चार दिन तक संघर्ष करती रहीं. इसी बीच उन्हें खोजने के लिए कई एजेंसियों की मदद से बड़ा सर्च ऑपरेशन भी चलाया गया.

रविवार (5 अप्रैल) को रेस्क्यू के बाद शारन्या ने बताया कि नीचे उतरते समय वह किसी तरह रास्ता भटक गईं और अपने ग्रुप तक वापस नहीं पहुंच पाईं. उनका फोन भी बंद होने लगा था. नेटवर्क बिल्कुल नहीं था, जिससे वह पूरी तरह से दुनिया से कट गई थीं. मदद के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पा रही थीं.

पहले दिन शाम तक चलती रहीं शारन्या

शारन्या ने बताया कि पहले दिन वह शाम तक चलती रहीं, लेकिन घने जंगल की वजह से आगे बढ़ना मुश्किल हो गया. इसलिए वह एक पानी के झरने के पास रुक गईं. इसके बाद के दिनों में वह बीच-बीच में चलती रहीं, इस उम्मीद में कि कहीं रास्ता या कोई इंसान मिल जाए.

बिल्कुल डर नहीं लगा शारन्या को

शारन्या ने बताया कि जंगल में हाथियों जैसे जंगली जानवरों का खतरा और लगातार बारिश होने के बावजूद उन्हें बिल्कुल डर नहीं लगा. उन्होंने कहा कि मुझे डर महसूस ही नहीं हुआ, पता नहीं क्यों? जब वह जंगल से बाहर आईं, तो वह पूरी तरह शांत और संभली हुई नजर आ रही थीं.

शारन्या ने बताया कि रास्ता भटकने के बाद उन्होंने पहाड़ी पर कुछ लोगों को देखा और उनकी तरफ ऊपर चढ़ने लगीं, लेकिन वे जल्दी नजरों से ओझल हो गए. फिर वह नीचे उतरीं, जहां नेटवर्क चला गया और घने जंगल में पहुंच गईं. उनका फोन भी बंद हो गया.

झरने के पास रात बिताई शारन्या ने

शारन्या ने बताया कि वह एक पत्थरों वाले झरने के पास पहुंचीं और वहीं रात बिताई. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पैर में दर्द था, इसलिए पहले दिन ज्यादा नहीं चलीं. दूसरे दिन वह ऐसे खुले इलाके में रहीं, जहां दूर तक दिखता था, ताकि अगर ड्रोन से तलाश हो तो उन्हें आसानी से देखा जा सके.

बारिश ने प्लान बिगाड़ दिया शारन्या का

शारन्या ने बताया कि तीसरे दिन वह ऊंचाई पर चढ़ने का सोच रही थीं, लेकिन बारिश ने प्लान बिगाड़ दिया. रविवार को दोपहर तक वह कपड़े सूखने का इंतजार करती रहीं. इस दौरान वह बीच-बीच में जोर-जोर से आवाज लगाती रहीं. आखिरकार सर्च टीम में शामिल स्थानीय लोगों ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें ढूंढ निकाला.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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