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Home National संघ से जुडी शैक्षणिक संस्था ने चिकित्सा पाठ्यक्रम में आयुर्वेद और सिद्ध पद्धति शामिल करने को कहा

संघ से जुडी शैक्षणिक संस्था ने चिकित्सा पाठ्यक्रम में आयुर्वेद और सिद्ध पद्धति शामिल करने को कहा

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संघ से जुडी शैक्षणिक संस्था ने चिकित्सा पाठ्यक्रम में आयुर्वेद और सिद्ध पद्धति शामिल करने को कहा

नयी दिल्ली : मोदी सरकार जहां शिक्षा का भगवाकरण करने के आरोप का सामना कर रही है वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुडी एक शैक्षणिक संस्था ने चिकित्सा शिक्षा में एकीकृत पाठ्यक्रम लागू करते हुए उसमें आयुर्वेद, सिद्ध एवं अन्य स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों को शामिल करने की मांग की है. इसके साथ ही इसने समाज शास्त्र से लेकर मानविकी तक और चिकित्सा से लेकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी तक उच्च शिक्षा के हर क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव की वकालत की है.

इसके अलावा इसमें मूल्य आधारित शिक्षा को जोडने की बात कही है ताकि इनसे भारतीय और अन्य शिक्षा पद्धतियों के बीच का अंतर सामने आ सके. हिंदू शिक्षा बोर्ड ने सुझाव दिया है कि विज्ञान के छात्रों के पाठ्यक्रम में भारतीय परंपराओं को शामिल किया जाए और इसमें निर्देश के प्रभावी माध्यम के रूप में अंग्रेजी के स्थान पर ‘भारतीय’ भाषाओं का इस्तेमाल किया जाए. इस हिंदुत्व निकाय के हाल में हुए सम्मेलन के मात्र कुछ ही सप्ताह बाद इस आशय का प्रस्ताव मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंपा गया है.

इस सम्मेलन में मंत्री स्मृति ईरानी और उनके मंत्रालय के सहयोगियों के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव कृष्ण गोपाल ने हिस्सा लिया था. सम्मेलन में गोपाल ने समूची शिक्षा व्यवस्था में आमूल चूल बदलाव कर इसमें हिंदु विचारों को शामिल करने का आग्रह किया था. बोर्ड ने कहा है कि ह्यकाफी बडी संख्या में भारतीय आयुर्वेद, सिद्ध, नानी और अन्य स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों पर भरोसा करते हैं और ऐसा इसलिए है क्योंकि इनमें समय के साथ प्रभावी सिद्ध हुई जडी बूटियों से दवा बनाई जाती है, ये कम खर्चीली हैं और इन तक लोगों की आसानी से पहुंच है.

चिकित्सा का एक ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किये जाने की जरुरत है जिसमें इन विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की प्रमुख विशेषताओं को समाहित किया जा सके.’ महत्वपूर्ण यह है कि यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब मानव संसाधन विकास मंत्रालय नयी शिक्षा पद्धति तैयार करने के लिए देशभर में विचार विमर्श की प्रक्रिया को आगे बढा रहा है और बोर्ड का मानना है कि उसकी सिफारिशें इसके निर्माण में मुख्य भूमिका अदा करेंगी.

यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि उक्त समारोह में स्मृति ईरानी ने भी देश की शिक्षा की आंतरिक ताकत, प्राचीन अवधारणा और मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा था कि विदेश में इसकी सराहना की जाती है जबकि अपने ही देश में इसे भगवाकरण का प्रयास बताया जाता है. बहरहाल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान और परंपरा को शामिल करने पर जोर देते हुए हिन्दू शिक्षा बोर्ड ने कहा कि इससे छात्रों को काफी मदद मिलेगी.

उन्होंने उदाहरण के लिए कहा कि कंप्यूटर विज्ञान के छात्रों को पाणिनी और अन्य भारतीय भाषाशास्त्रियों द्वारा किये गये कार्यों का लाभ मिलेगा. बोर्ड के प्रस्ताव में प्राचीन परंपराओं और ज्ञान संबंधी बहुत से उदाहरण दिये गये हैं और हिंदुत्व समूहों का आरोप है कि पिछली सरकारों ने जानबूझकर इनकी उपेक्षा की है.

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