प्रख्यात पत्रकार प्रफुल्ल बिदवई का एमस्टर्डम में निधन
लंदन : प्रख्यात पत्रकार, लेखक और परमाणु विरोधी कार्यकर्ता प्रफुल्ल बिदवई की नीदरलैंड में रात का खाना खाने के दौरान मृत्यु हो गयी. उनके गले में मांस का एक टुकडा फंस गया था. दिल्ली के रहने वाले बिदवई 65 साल के थे. वह कल एमस्टर्डम में एक सम्मेलन में शरीक हो रहे थे तभी शहर […]
लंदन : प्रख्यात पत्रकार, लेखक और परमाणु विरोधी कार्यकर्ता प्रफुल्ल बिदवई की नीदरलैंड में रात का खाना खाने के दौरान मृत्यु हो गयी. उनके गले में मांस का एक टुकडा फंस गया था. दिल्ली के रहने वाले बिदवई 65 साल के थे. वह कल एमस्टर्डम में एक सम्मेलन में शरीक हो रहे थे तभी शहर के एक रेस्तरां में मांस का एक टुकडा उनके गले में फंस गया और उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गयी. नीदरलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने बताया वह इस मामले में सहायता कर रहा है.
हेग से दूतावास के एक प्रवक्ता ने बताया, बिदवई की मृत्यु के बारे में हमें आज सुबह सूचना मिली, जिनका कल रात करीब साढे नौ बजे (जीएमटी) निधन हो गया. वह दोस्तों और सहकर्मियों के साथ रात्रिभोज कर रहे थे तभी मांस के एक टुकडे के गले में फंसने से उनकी सांस रुक गयी. उन्होंने बताया कि हम स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क में है और आज या कल तक प्रक्रियागत चीजें पूरी हो जाने के बाद हम उनके शव को भारत भेजने की प्रक्रिया शुरु करेंगे.
बिदवई एमस्टर्डम के ट्रांसनेशनल इंस्टीट्यूट में फेलो थे जो अंतरराष्ट्रीय विद्वान,कार्यकर्ताओं का एक संगठन है.वह पत्रिकाओं और अखबारों में नियमित रुप से लिखा करते थे. इसके अलावा वह परमाणु विरोधी कार्यकर्ता भी थे. उन्होंने 1999 न्यू न्यूक्स : इंडिया, पाकिस्तान एंड ग्लोबल न्यूक्लियर डिसआर्ममेंट सहित कई पुस्तकें भी लिखी हैं.
भारतीय वाम पंथ में उत्पन्न संकट पर उनकी नयी पुस्तक इस साल के आखिर में रिलीज होने वाली थी. नागपुर में जन्में बिदवई ने कई साल तक टाइम्स ऑफ इंडिया में वरिष्ठ संपादक के पद पर काम किया. उन्होंने फ्रंटलाइन और हिन्दुस्तान टाइम्स के लिए कई साल तक नियमित रुप से स्तंभ भी लिखे थे.
वह नरेन्द्र मोदी नीत राजग सरकार के कटु आलोचक थे और ब्रिटेन के अखबार द गार्डियन में इस साल के शुरुआत में एक आलेख में उन्होंने लिखा था कि बडे स्तर पर शहरी स्वच्छता, गंगा की सफाई नदियों को जोडना या स्मार्ट सिटी बनाना जैसी मोदी की भव्य योजनाएं, दिखावटी और खोखले नारेबाजी हैं. वह सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट, नई दिल्ली में एक प्रोफेशनल फेलो, और नेहरु मेमोरियल म्यूजियम एंड लायब्रेरी में सीनियर फेलो भी थे.
