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कभी मोदी की विरोधी रही स्मृति ईरानी अब उनकी प्यारी बहना

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कभी मोदी की विरोधी रही स्मृति ईरानी अब उनकी प्यारी बहना

नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे युवा मंत्री स्‍मृति ईरानी को नरेंद्र मोदी ने शिक्षा विभाग का जिम्‍मा तो दे दिया, लेकिन शुरू से ही स्‍मृति की शिक्षा पर विपक्षी सवाल उठाते रहे हैं. फर्जी डिग्री मामले में दिल्‍ली के पूर्व कानून मंत्री जीतेंद्र तोमर के जेल जाने के बाद स्‍मृति पर विपक्ष का फिर से निशाना शुरू हो गया है. आइये जानते हैं स्‍मृति ईरानी क्‍यों हैं इतने विवाद में और नरेंद्र मोदी की विरोधी रही स्‍मृति कैसे बनीं प्रधानमंत्री की मुंहबोली बहन –

स्मृति ईरानी का जन्म 23 मार्च 1976 को दिल्ली में हुआ और उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में ही शिक्षा ग्रहण की. उन्होंने 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद से पैसा कमाना शुरू कर दिया था.कहते है कि कक्षा 12 तक अध्ययन के बाद उन्होनें आगे की शिक्षा बंद कर दी थी. वे आज तक अपनी शैक्षिक योग्यता के परस्पर विरोधी हलफनामों को प्रदान कर रही हैं.

स्मृति ने सारी बंदिशें तोड़कर ग्लैमर जगत में कदम रखा.मुम्बई आने के बाद उन्हे कई विकल्प दिख रहे थेइसलिए उन्होंने बांद्रा के मैकडॉनल्ड्स में काम करना शुरू किया.फिर वे सौंदर्य प्रसाधनों के प्रचार से लेकर मिस इंडिया प्रतियोगिता की प्रतिभागी भी बनीं.उन्होंने वर्ष 2000 में टेलीवीजन सीरियल ‘हम है कल आज कल और कल’ के साथ अपने करियर की शुरुआत की और एकता कपूर के सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में लीड रोल निभाया। इसके साथ ही उनकी पहचान एक कलाकार के रुप में बन गई
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स्मृति ने टीवी शो भी प्रड्यूस किया. उगरया एंटरटेनमेंट के बैनर तले ‘विरुद्ध’ और ‘थोड़ी सी जमीन थोड़ा सा आसमान’ बनाया.वे ग्यारह इंडियन टेली अवार्ड और आठ स्टार परिवार पुरस्कार जीत चुकी हैं.
उनके दादा एक आरएसएस स्वयंसेवक और उनकी माँ जनसंघ की एक सदस्य होने के कारण ‘बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की हिस्सा’बन गई थी.
वर्ष 2001 में स्मृति ने शादीशुदा जुबिन ईरानी पारसी से शादी की और स्मृति ज़ुबिन ईरानी का राजनीतिक जीवन वर्ष 2003 से शुरू हुआ.वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्य बनी और दिल्ली के चाँदनी चौक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ी..वर्ष 2004 में इन्हें महाराष्ट्र यूथ विंग का उपाध्यक्ष बनाया गया.वर्ष 2011 में वे गुजरात से राज्यसभा की सांसद चुनी गई.भारतीय आम चुनाव, 2014 में स्मृति ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास को कड़ी चुनौती दी.हालांकि उनकी चुनावी राजनीती कभी सफल नहीं रही,उन्हें भारत सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया.
गुजरात दंगे के बाद, उन्होंने नरेंद्र मोदी का विरोध किया था परन्तु एल के अडवाणी के घर पर उनकी भेट जब मोदी से हुईं,उन्होनें स्मृति जी को आशीर्वाद दिया.स्मृति बीजेपी से अपना वैचारिक रिश्ता बताती हैं.कहा जा रहा है कि वह मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार में सुषमा स्वराज बनेंगी.

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