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जानिये क्या है पूर्ति ग्रुप पर लग रहे आरोपों का पूरा सच?

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जानिये क्या है पूर्ति ग्रुप पर लग रहे आरोपों का पूरा सच?

नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एक बार फिर भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर खुलकर मैदान में उतर गये हैं. गडकरी भूमि अधिग्रहण पर विपक्ष के द्वारा उड़ाये जा रहे धूल को साफ करने में लगे हैं. कांग्रेस और अन्य विरोधी पार्टियां भूमि अधिग्रहण में कई कमियां गिना रही है.वहीं, दूसरी ओर विपक्ष उन्हें जब-तब पूर्ति ग्रुप से संबंधों के मुद्दे पर घेरती रहती है.

सदन से लेकर सड़क तक विपक्ष इसी मुद्दे के दम पर अपने खोये जनाधार को समेटने में लगा है. वही गडकरी एक मात्र ऐसे नेता है जो मीडिया से लेकर जनसभा और रैलियों में विपक्ष को चुनौती देते नजर आ रहे हैं. लेकिन गडकरी के लिए यह राह आसान नहीं है, पिछले दिनों सदन में पेश हुई कैग की रिपोर्ट में गडकरी की कंपनी पूर्ति ग्रुप पर ऋण में अनियमितता के आरोप लगे. इन आरोपों के बाद गडकरी को सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच सफाई देनी पड़ी. आइये समझते हैं कि आखिर कैग की रिपोर्ट में ऐसा क्या था जिसके कारण गडकरी विपक्ष के घेरे में आ गये.

क्या है कैग की रिपोर्ट
कैग (नियंत्रक एवं महा लेखा परीक्षक) की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ की नितिन गडकरी की कंपनी पूर्ति ग्रुप ने नागपुर में 22 मेगावाट बिजली प्रोजेक्ट के लिए मार्च 2002 में इरडा से 84.12 करोड़ रुपए का लोन लिया. इस प्रोजेक्ट में बगास यानी गन्ने के बचे हुए अंश से बिजली बनायी जानी थी. लेकिन पूर्ति ग्रुप ने ऋण की शर्तों को तोड़ते हुए कोयले से बिजली बनाना शुरू कर दिया. इरडा से सिर्फ रीन्यूएबल एनर्जी वाले प्रोजेक्ट के लिए ही लोन मिलता है.
इतना ही नहीं प्रोजेक्ट फरवरी 2004 की बजाय मार्च 2007 में शुरू हुआ, जबकि 2007 में ही यह प्रोजेक्ट नॉन परफ़ॉर्मिंग ऐसेट घोषित हुआ था. बावजूद इसके इरडा ने पूर्ति ग्रुप को पूरा लोन दिया. जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब तक पूर्ति ग्रुप ने सिर्फ 71.35 करोड़ रुपए ही लौटाया है. जिससे सरकार को 12.77 करोड़ का घाटा हुआ है. हालांकि सदन में कैग की रिपोर्ट पर गडकरी ने अपना पक्ष रखा और पूरे मामले को समझाने की कोशिश की लेकिन विपक्ष ना तो उनके पक्षों को सुनने के लिए तैयार था और ना ही इस्तीफे की मांग से पीछे हटने के लिए
बार- बार गडकरी पर क्यों लगते हैं आरोप?
नितिन गडकरी पर इस तरह के आरोपों का लगना और गडकरी का इनसे बचकर बाहर निकलना कोई नयी बात नहीं है. इससे पहले भी पूर्ति ग्रुप की आर्थिक गड़बड़ियों को लेकर गडकरी पर गंभीर आरोप लगे थे. तब वह भाजपा के अध्यक्ष थे. कंपनी के मुनाफे के लिए अपने ड्राइवर और दूसरे सहयोगी के नाम से कंपनी खोलने का आरोप जब गडकरी पर लगा तो उन्हें भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद की कुर्सी गंवानी पड़ी लेकिन गडकरी इन आरोपों से बचकर बाहर निकल गये. विदेश में छुट्टी मनाने के लिए किसी कंपनी के सहयोग से क्रूज पर सफर करने का ताजा आरोप भी इन पर लगे.
गडकरी ने यह कहकर इस विवाद से पल्ला झाड़ लिया कि जिस वक्त उन्हें यह मौका मिला वह किसी पद पर नहीं थे, इसलिए कंपनी को लाभ पहुंचाने का तर्क गलत है. सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर दिल्ली में ई रिक्शा के प्रतिबंध पर भी उदार रवैया अपनाने और आसानी से ई रिक्शा उपलब्ध कराने का आरोप लगा. इसे लेकर आरोप लगते रहे ई रिक्शा बनाने वाली कंपनी से गडकरी के संबंध है. गडकरी की इस नीति पर सवाल तक खड़े हुए जब ई रिक्शा से दुर्घटना के कारण दिल्ली के त्रिलोकपुरी में एक बच्चे की मौत हो गयी थी. इसके बाद ई रिक्शा के बगैर ड्राइविंग लाइसेंस के संचालन पर सवाल खड़े हुए.
भूमि अधिग्रहण का बचाव और भ्रष्टाचार पर सफाई
नितिन गडकरी को पूर्ति ग्रुप पर लग रहे आरोपों को लेकर सामने आना पड़ा गडकरी ने अपने बयान में कैग की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किये. हालांकि उन्होंने इसी रिपोर्ट का हवाला दिया कि इसमें भ्रष्टाचार जैसे किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है. गडकरी इस शब्द पर इसलिए भी जोर दे रहे थे, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के ऐजेंडे में सबसे ऊपर भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई है. मोदी अपने एक साल के कामकाज को गिनाने से पहले यह बताना नहीं भूलते कि सरकार पर अबतक भ्रष्टाचार के एक भी आरोप नहीं लगे. विपक्ष इसे भ्रष्टाचार बताकर सरकार को घेरने में लगा था.
विपक्ष ने गडकरी को इसलिए भी निशाने पर लिया क्योंकि गडकरी विपक्ष के एकमात्र मुद्दे भूमि अधिग्रहण पर सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को चुनौती दे चुके हैं. कई बार सोनिया और गडकरी के बीच खत के जरिये गरमागरम बहस भी छिड़ी है. गडकरी ने एक टीवी चैनल पर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर सीधी बहस की, जिसमें उन्होंने मुआवजे पर विपक्ष द्वारा फैलाये गये भ्रम पर स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर आपकी बात सही हुई तो मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं. विपक्ष गडकरी के इस्तीफे की मांग करके सरकार को दो मोरचों पर घेरना चाहती थी.

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