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आर्थिक नरमी के दौरान पर्यावरण सुरक्षा संबंधी अभियान कमजोर पडे : आइआइएम

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आर्थिक नरमी के दौरान पर्यावरण सुरक्षा संबंधी अभियान कमजोर पडे : आइआइएम

अहमदाबाद : पर्यावरण सुरक्षा के समर्थन से जुडे अभियान आर्थिक नरमी के दौरान कमजोर पडे. यह बात यहां भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) की एक रिपोर्ट में कही गयी है.

इस रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि ऐसी परिस्थितियां भारत जैसे विकासशील देश के परिप्रेक्ष्य में मुश्किल हो सकती है. इसमें कहा गया है कि 2006 जो आर्थिक तेजी के दौर का परिचायक है और 2014 जो आर्थिक नरमी के दौर का प्रतिनिधित्व करता है, के बीच की अवधि में पर्यावरण सुरक्षा के मुकाबले आर्थिक वृद्धि के समर्थन में स्पष्ट रूप से तब्दीली आई. साल 2006 में जब 52 प्रतिशत लोग पर्यावरण सुरक्षा को तरजीह दे रहे थे सिर्फ 35 प्रतिशत लोग ही आर्थिक वृद्धि को महत्वपूर्ण मान रहे थे.

सहायक प्रोफेसर रमा मोहना तुरागा के नेतृत्व में हुए अध्ययन में कहा गया कि 2014 में पर्यावरण सुरक्षा को तरजीह देने वालों की तादाद घटकर 36.2 प्रतिशत रह गई जबकि 49.3 प्रतिशत लोग अब आर्थिक वृद्धि को तरजीह देते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया कि आर्थिक नरमी के दौरान पर्यावरण सुरक्षा को कम तरजीह मिलना पर्यावरण के लिहाज से टिकाउ विकास सुनिश्चित करना मुश्किल होगा. इसमें कहा गया कि भारत में बड़े पैमाने पर जंगल का क्षरण हो रहा है. पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ईपीआई) के मुताबिक पर्यावरण की स्थिति और पारिस्थितिकी जीवंतता के आधार पर तैयार सूची में भारत 2014 में 178 देशों में 155 वें स्थान पर है.

आईआईएम के अध्ययन में विश्व बैंक की 2013 की रपट के मुताबिक कुछ अनुमानों के मुताबिक भारत की राजधानी नई दिल्ली विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में से है. भारत में पर्यावरण क्षरण की लागत सकल घरेलू उत्पाद के 2.6 प्रतिशत से 8.8 प्रतिशत के बीच है.

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