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आम आदमी पार्टी में बिखराव के लिए जिम्मेवार कौन ?

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आम आदमी पार्टी में बिखराव के लिए जिम्मेवार कौन ?
नयी दिल्लीः आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आज बहुमत से योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार और अजीत झा को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. पार्टी से बाहर निकलते ही योगेन्द्र ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दे दिया. पार्टी में बहुत दिनों से जारी उठापटक एक बड़े फैसले के साथ शायद थम जाए लेकिन दो गुटों में बंटी पार्टी में इतनी आसानी से सबकुछ ठीक होता नजर नहीं आता. एक गुट केजरीवाल के साथ खड़ा है जो योगेन्द्र और प्रशांत का पार्टी में बने रहने का विरोध कर रहा है. दूसरा गुट योगेन्द्र और प्रशांत के साथ है जो पार्टी के व्यक्तिगत आधारित होने का आरोप लगा रही है. इन सबके बीच एक तीसरा गुट भी है वो गुट है आप के सामान्य कार्यकर्ताओं का है जो पार्टी के अंदर जारी घमासान को किसी तरह खत्म करना चाहते हैं और बीच का रास्ता निकालना चाहते है. पार्टी के कई नेता नहीं चाहते कि जिस तरह जनता परिवार टूट कर बिखर गया वही हाल आप का हो.
कैसे शुरु हुआ विवाद
पार्टी के कई दिग्गज नेता चिट्ठियों के जरिये कई तरह के फैसले का विरोध करते है. पार्टी के बड़े नेता इस अलग विचारधारा पर यह बयान देते रहे कि यह लोकतांत्रिक पार्टी है और नेताओं के अलग विचार इसे साबित करते हैं हमारी पार्टी में सभी तरह के विचारों का, निर्णयों का सम्मान किया जाता है और आपसी सहमति से फैसला लिया जाता है. धीरे- धीरे पार्टी के अंदर का गतिरोध ब्लॉग और सोशल साइट के जरिये बाहर आते रहे. एक धड़ा दिल्ली के बाद राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का विस्तार चाहती थी केजरीवाल दिल्ली पर फोकस करना चाहते थे एक टीवी चैनल को दिये इंटरव्यू में केजरीवाल ने यह बात मानी थी कि कुछ लोग इसे राष्ट्रीय स्तर पर जल्दी खड़ा करना चाहते थे. पार्टी में दूसरा मतभेद पद को लेकर हुआ. दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद केजरीवाल संयोजक पद पर बने हुए थे कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और किसी औऱ को संयोजक बनाने की बात की. इस पूरे मामले ने तूल पकड़ा और बड़े – बड़े खुलासे होने लगे. प्रशांत और योगेन्द्र पर विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी को हराने तक का आरोप लगा.
गुरु ने सिखाये गुर चेले ने किया उन्ही पर इस्तेमाल
दिल्ली में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनता को स्टिंग के गुर सीखाये. लोगों को भ्रष्टाचार से लड़ने का एक नया हथियार देने की बात कही. आप नेता उमेश कुमार ने अरविंद केजरीवाल और उनके बीच की बातचीत को रिकार्ड करके उनके द्वारा सिखाये गये गुर को उन्ही पर आजमा दिया. केजरीवाल ने पार्टी में बढ़ते गतिरोध से दूरी बना रखी थी. अरविंद यह दिखाने की कोशिश में थे कि इस पूरे विवाद से उनका कोई लेना देना नहीं वह सिर्फ सरकार चलाने में लगे है औऱ जनता की सोचते हैं. लेकिन इस तथाकथित स्टिंग ने उनके मन की बात को जनता के सामने रख दिया. जिस तरह उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं के लिए शब्दों का इस्तेमाल किया वह चौंकाने वाला था. उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं अगर उनसे इस मामले पर नरमी बरतने को कहा गया तो वह अपने विधायकों को लेकर एक अलग पार्टी बना लेंगे. उमेश ने स्टिंग के बाद कहा कि मैंने उन्ही से यह विद्या सीखी है इसके लिए मैं उनका धन्यवाद देता हूं.
अब आगे क्या होगा
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आज अहम फैसला लिया गया. बागियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया. हालांकि प्रो आनंद कुमार ने कहा कि हम ना तोड़ेंगे ना टूटेंगे, सुधरेंगे और सुधारेंगे. उन्होंने इशारा किया कि पार्टी हम छोड़ने वाले नहीं है हमें भले ही अब महत्वपूर्ण पद से हटा दिया गया है लेकिन हम अब आम कार्यकर्ता की तरह पार्टी के लिए काम करेंगे. पहले हम पर बहुत जिम्मेदारियां थी अब हमारे सर से यह बोझ हट गया है अब पार्टी की बेहतरी के लिए काम करना आसान हो गया है. दूसरी तरफ प्रशांत भूषण ने इशारों में इस पूरे फैसले पर कोर्ट जाने का इशारा किया. योगेन्द्र इस पूरी प्रकिया को लोकतंत्र की हत्या बता रहे हैं. ये तो हुई एक पक्ष की बात दूसरा पक्ष इस फैसले के बाद शांत है और मान रहा कि इनके पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण उन्हें हटाया गया. अब एक तरह चर्चा है कि इन सभी को पार्टी से भी बाहर निकाल दिया जायेगा. पार्टी से बाहर हुए विनोद कुमार बिन्नी और साजिया ने अरविंद पर आरोप लगाया कि वह अपने आसपास चापलुसों को पसंद करते हैं उनकी अपनी चौकड़ी है. बिन्नी ने आगे की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि प्रशांत और योगेन्द्र के बाहर आने के बाद अब आशुतोष, आशीष खेतान और कुमार विश्वास को पार्टी से बाहर निकाला जायेगा. हो सकता है यह घटना भी कुछ महीनों में आप में देखने को मिलेगी.
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