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इन पांच बड़े कारणों से टला राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का फैसला ?

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इन पांच बड़े कारणों से टला राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का फैसला ?
-मनोज अग्रवाल-
नयी दिल्ली : राहुल गांधी को आगामी माह अप्रैल में कांग्रेस अध्यक्ष बनाये जाने पर संशय बरकरार है. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अप्रैल में पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा. पहले ऐसा माना जा रहा था कि अप्रैल में होने वाले अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की होने वाली बैठक में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष का ताज दिया जा सकता है. इसके लिए स्पेशल सत्र बुलाए जाने की संभावना भी जतायी जा रही थी.
किन्तु अब ऐसा माना जा रहा है कि न तो कोई स्पेशल सत्र बुलाया जाएगा और न ही उनको फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष बनाये जाने की संभावना है. राहुल को फिलहाल अध्यक्ष की जिम्मेवारी नहीं दिये जाने के पीछे जानकार जो प्रमुख कारण मानते हैं वे कुछ इस प्रकार हैं-
राहुल का लंबी छुट्टी पर जाना

राहुल गांधी लंबे समय से छुट्टी पर हैं. कुछ दिन पहले तो ऐसी भी अटकलें लग रही थी कि राहुल गांधी कहां है यह किसी को पता नहीं है. अभी भी राहुल गांधी बाहर हैं और उनके इस माह के अंत तक स्वदेश लौटने की उम्मीद है. ऐसे में उनके अप्रैल में तुरंत लौटने के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का स्पेशल सत्र बुलाना आसान नहीं होगा. पार्टी के नियम के अनुसार स्पेशल सेशन के लिए पहले से नोटिस देना पडता है. दूसरी और तय सीमा से अधिक सीमा तक छुट्टी में रहना वो भी तब जब संसद सत्र चल रहा हो उनकी क्षमता पर भी सवाल उठाता है.
पार्टी के आला नेता सोनिया को ही कंटीन्यू करने के पक्ष में

कांग्रेस के आला नेता यह चाहते हैं कि पार्टी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए सोनिया गांधी जैसी अनुभवी के पास ही पार्टी के कमान को रहने देना चाहिए. अभी लोकसभा चुनाव में हार, और उसके बाद के कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद आला नेता नहीं चाहते हैं कि अभी राहुल को इसकी कमान सौंपी जाय. खुद सोनिया गांधी भी अभी इस मूड में नहीं है कि राहुल को इस विकट परिस्थिति में पार्टी की कमान सौंप दी जाय.
सितंबर में होने वाले पार्टी संगठन के चुनाव में राहुल को किया जा सकता है आगे

इसी वर्ष सितंबर में पार्टी संगठन का चुनाव होने वाला है. ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी सितंबर में राहुल गांधी को चुनावी प्रक्रिया के तहत कांग्रेस अध्यक्ष बना सकती है. तब तक पार्टी को अपनी आंतरिक कमजोरियों पर विचार विमर्श का कुछ और समय मिल जाएगा. पार्टी के अंदर कांग्रेस सुप्रीमो को लेकर पार्टी नेताओं में मतभेद हैं. कई नेता राहुल को कमान सौंपे जाने के पक्ष में है तो कई नेता चाहते हैं कि सोनिया गांधी ही इसका नेतृत्व करे. कुछ तो प्रियंका गांधी को भी आगे करने की मांग कर रहे हैं. ऐसे में पार्टी चाहेगी कि पहले वैचारिक रुप से एक मत बना लिया जाय ताकि आगे होने वाले संगठन चुनाव में कोई मतभेद नहीं उभरे और आम सहमति से फैसला लिया जा सके.
सोनिया की वेट एंड वाच की नीति

सोनिया गांधी राहुल के संदर्भ में वेट एंड वाच के फार्मूले पर काम कर रही है. वह नहीं चाहती है कि विपरीत परिस्थिति में राहुल को लांच किया जाय और पार्टी की सारी गलतियों या खामियों का ठिकरा उनके सर फूटे. इसी साल बिहार विधानसभा चुनाव होने हैं, फिर 2016 में बंगाल में और 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सोनिया गांधी एक ऐसे अवसर की तलाश में है जिसमे राहुल को पार्टी की कमान सौंपा जाय और वह पूरे जोश और अनुकूल माहौल में पार्टी के लिए काम कर पाये.
कांग्रेस को भूमि अधिग्रहण बिल और काले धन को लेकर मिल गया है मुद्दा

लोकसभा और पिछले विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद खामोश रहने वाली कांग्रेस को हाल में काले धन और विशेषकर भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर सरकार को घेरने का एक बडा मुद्दा मिल गया है. पार्टी इसको लेकर सरकार पर लगातार हमले किये जा रही है. जो भाजपा भूमि सौदा घोटाला को लेकर कांग्रेस को घेरती रही है आज कांग्रेस को इस बिल के रुप में उसे घेरने का अच्छा मौका मिला है. कांग्रेस को इसके विरोध में जनसमर्थन भी मिल रहा है. ऐसे में कांग्रेस चाह रही है कि कुछ इसी बहाने पार्टी की छवि सुधरेगी और यह मजबूत स्थिति में होगी. इसके बाद से राहुल को पार्टी में आगे किया जाना उचित रहेगा.
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