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धार्मिक असहिष्णुता को सिर उठाते ही कुचलने की जरुरत : अदालत

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धार्मिक असहिष्णुता को सिर उठाते ही कुचलने की जरुरत : अदालत

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि धार्मिक असहिष्णुता की बढती घटनाओं को सिर उठाते ही कुचलना होगा और इस तरह की चीजें आग की तरह फैलने से देश में समस्या हो सकती है. आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘पीके’ के खिलाफ दाखिल एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति आर एस एंडला की पीठ ने कहा, ‘मौजूदा याचिका देश में असहिष्णुता के बढते प्रचलन को दर्शाती है और इस तरह के चलन को सिर उठाते ही कुचलना होगा, अन्यथा यह जंगल की आग की तरह फैल सकता है और देश में समस्या खडी कर सकता है.’

पीठ ने यह भी कहा कि संविधान में किसी भी कलाकार को सामाजिक वास्तविकता को कला के किसी भी स्वरुप में चित्रित करने का अधिकार मिला है. दर्शक सोच समझकर फिल्म देखना पसंद करते हैं और जिन्हें किसी विशेष फिल्म की विषयवस्तु से आपत्ति है, उन्हें इसे नहीं देखने की पूरी आजादी है.

दुनियाभर में 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करने वाली ‘पीके’ के संबंध में उच्च न्यायालय ने कहा कि फिल्म में एक सामाजिक बुराई की ओर ध्यान खींचा गया है और उसे हिंदू धर्म के आस्था और विश्वास के अपमान के तौर पर या सांप्रदायिक सोच को बढावा देने के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
अदालत ने ‘पीके’ के कुछ दृश्यों को आपत्तिजनक बताने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. याचिका में फिल्म से इस तरह के दृश्यों को हटाने का निर्देश देने की मांग की गयी है. जनहित याचिका में दावा किया गया था कि फिल्म की विषयवस्तु से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं.
पीठ ने आगे यह भी कहा, हमारे जैसे विविधतापूर्ण देश में लगभग सभी धर्मों के लोग रहते हैं और यहां धर्म के मामले में लोग अत्यंत सहिष्णु होते हैं. उच्च न्यायालय स्थानीय पुजारी अजय गौतम की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था.

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