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हर्षवर्धन ने कहा, हमें अपने प्रचीन विज्ञान पर शर्म नहीं करनी चाहिए

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हर्षवर्धन ने कहा, हमें अपने प्रचीन विज्ञान पर शर्म नहीं करनी चाहिए

हैदराबाद: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने आज सात हजार साल पहले विमान के अस्तित्व के बारे में बात करने वाले अध्ययन पत्र का बचाव किया और इन आलोचनाओं को खारिज किया कि भारतीय विज्ञान कांग्रेस का ध्यान देश के प्राचीन विज्ञान इतिहास पर केन्द्रित है.

उन्होंने हाल में संपन्न विज्ञान कांग्रेस में पेश विमान के अस्तित्व को लेकर अध्ययन पत्र से जुडे सवालों के जवाब में कहा, ‘‘अखबारों के कुछ लेखों से यह नजरिया बनता है कि भारतीय विज्ञान कांग्रेस में वे केवल विज्ञान के इतिहास पर चर्चा कर रहे हैं. किसी व्यक्ति को अपने गौरवमयी अतीत पर शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए.’’
मंत्री ने कहा, ‘‘हमें इसे स्वीकार करना होगा और यहां तक कि पश्चिम ने भी इसे स्वीकार दस्तावेज और वेदों में स्वीकार किया है और केवल वेदों में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों में भी हर क्षेत्र में बडे पैमाने पर हमारा (भारत का) ज्ञान (का जिक्र) है.’’ उन्होंने कहा कि भारत न केवल विज्ञान बल्कि चिकित्सा, कला, संस्कृति, वाणिज्य और अनेक क्षेत्रों में सबसे शक्तिशाली है.
हर्षवर्धन ने कहा, ‘‘इसलिए अगर भारतीय विज्ञान कांग्रेस में कोई अध्ययन पत्र प्रकाशित (प्रस्तुत) किया जाता है जो अतीत की इन उपलब्धियों को बताता हो, अतीत के अनुभव साझा करना चाहता हो और आज जो कुछ हो रहा है तथा जो भविष्य का हमारा लक्ष्य है उसे उसके साथ लाकर जोडता हो, तो मुझे लगता है कि हमें इसकी बहुत परवाह नहीं करनी चाहिए.’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, मुझे लगता है कि देश पूरी तरह से स्पष्ट है. हमारी सरकार और हमारे वैज्ञानिक, वे अत्याधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक कुशाग्रता का उपयोग कर रहे हैं.’’ मंत्री ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बढावे के साथ ‘डिजिटल इंडिया’ की संकल्पना के तहत ‘पूर्ण डिजिटल’ होने के प्रयास कर रहा है.
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