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मोदी सरकार बना रही है नयी रक्षा खरीद नीति

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मोदी सरकार बना रही है नयी रक्षा खरीद नीति
नयी दिल्ली: पारदर्शी तरीके से रक्षा साजो-सामान की त्वरित खरीद के उद्देश्य से नरेंद्र मोदी सरकार जनवरी तक एक नयी रक्षा खरीद नीति लाने पर विचार कर रही है, जिसमें निवेश आकर्षित करने के अलावा कंपनियों को काली सूची में डालने व एजेंटों को रखने के बारे में नए नियम होंगे. नए रक्षा मंत्री के रूप में मनोहर पर्रिकर के आने की वजह से ऐसी उम्मीद थी कि रक्षा मंत्रालय के काम-काज और निर्णयों में तेजी आएगी.
प्रस्तावित दिशा-निर्देशों पर रक्षा मंत्रालय में जबरदस्त मंथन चल रहा है. सूत्रों ने संकेत दिया कि यह रक्षा खरीद नीति का हिस्सा हो सकता है, जिसकी वार्षिक आधार पर समीक्षा होती है या फिर इसे अलग से भी पेश किया जा सकता है.
आधिकारिक सूत्रों ने कहा, इस नीति का मुख्य जोर यह पक्का करना है कि रक्षा बलों के लिए अत्यधिक जरुरी खरीद पारदर्शी लेकिन त्वरित ढंग से की जाय. नयी नीति इस साल के अंत तक या जनवरी की शुरुआत में आ सकती है. उन्होंने कहा कि नयी नीति में कंपनियों को काली सूची में डालने के मुद्दे का भी समाधान किया जाएगा क्योंकि आंख मूंदकर प्रतिबंध लगाए जाने से रक्षा बलों के हित प्रभावित होते हैं और उनकी खरीद रुक जाती है.
सूत्रों ने कहा, सरकार की सोच यह है कि रक्षा कंपनियों पर आंख मूंदकर प्रतिबंध न लगाया जाए. ऐसे मामलों में नाप-तौल कर कदम उठाए जा सकते हैं. प्रस्तावित नीति में इस बात की रुप-रेखा होगी कि विभिन्न प्रकार के अपराधों में किस स्तर की दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
गौरतलब है कि संप्रग सरकार में रक्षा मंत्री रहे ए.के. एंटनी के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार के मामलों के चलते कई कंपनियों को काली सूची में डाल दिया गया था. इसी तरह की पिछली कार्रवाई इतावली कंपनी फिनमेकैनिका के खिलाफ हुई थी जो 3,600 करोड़ रुपए के वीवीआईपी हेलीकाप्टर सौदे से संबंधित थी.
हालांकि, इस साल अगस्त में मोदी सरकार ने फिनमेकैनिका और उसकी अनुषंगी अगस्ता वेस्टलैंड को एक सीमित क्षमता में भारत के साथ कारोबार करने की अनुमति दे दी. इन दोनों कंपनियों पर भावी निविदाओं में भागीदारी पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन समूह के साथ मौजूदा ठेकों को जारी रखने की अनुमति दी गई है.
‘एजेंटों’ के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने कहा कि भारत में स्थानीय प्रतिनिधियों या कार्यालय के बगैर एक विदेशी कंपनी भारत में काम करे, यह उम्मीद नहीं की जा सकती.
उन्होंने कहा, रक्षा खरीद प्रक्रियाएं थकाऊ, लंबी एवं जटिल होती हैं. इसलिए यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि हजारों मील दूर स्थित एक कंपनी बगैर स्थानीय कार्यालय या लोगों के यहां काम करे. सूत्रों ने यह भी कहा कि मोदी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति को नए दिशा-निर्देशों के तहत जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा.
उन्होंने कहा, सरकार ऐसे उपाय भी तलाशेगी जिससे मेक इन इंडिया नीति को प्रोत्साहन मिल सके और रक्षा क्षेत्र में अधिक विदेशी निवेश आकर्षित हो. पिछले सप्ताह रक्षा खरीद परिषद की पहली बैठक में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इन मुद्दों पर चर्चा की थी.
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