मोदी का टूटा भ्रम, माना छोटे कैबिनेट से भारत में नहीं चलेगा काम, अब किया मंत्रियों का बोझ हल्का
नयी दिल्ली : आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह अहसास हो गया कि भारत जैसे विशाल व विविधताओं से भरे देश में छोटे मंत्रिपरिषद से काम चलाना मुश्किल है. इसलिए अपनी सरकार के पांच महीने के कार्यकाल के बाद उन्होंने अपने पहले कैबिनेट विस्तार में 22 नये मंत्रियों को शामिल किया है. यह संख्या मोदी […]
नयी दिल्ली : आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह अहसास हो गया कि भारत जैसे विशाल व विविधताओं से भरे देश में छोटे मंत्रिपरिषद से काम चलाना मुश्किल है. इसलिए अपनी सरकार के पांच महीने के कार्यकाल के बाद उन्होंने अपने पहले कैबिनेट विस्तार में 22 नये मंत्रियों को शामिल किया है. यह संख्या मोदी के शुरुआती मंत्री परिषद से लगभग आधा है. 26 मई को जब मोदी सरकार ने शपथ ग्रहण किया था, उसमें प्रधानमंत्री सहित कुल 46 मंत्री थे. आज मोदी सरकार के 21 नये मंत्रियों ने शपथ ग्रहण किया.
चुनाव प्रचार के दौरान मोदी के वक्तव्यों से हमेशा यह संकेत मिला कि वे अपनी सरकार बनने पर छोटा कैबिनेट ही रखेंगे. मोदी ने शपथ ग्रहण के बाद ऐसा ही किया, उन्होंने अपेक्षाकृत अधिक छोटा मंत्रिपरिषद गठित किया. जिसमें 46 सदस्य थे. गोपीनाथ मुंडे के असामयिक निधन के बाद यह संख्या 45 हो गयी. मोदी के इस छोटे कैबिनेट में कई मंत्रियों के पास तीन-मंत्रलयों का प्रभार रहा है.
मोदी सरकार के कद्दावर मंत्री अरुण जेटली के पास दो सबसे अहम मंत्रलय वित्त व रक्षा के प्रभार अबतक रहा है. उस पर वाणिज्य मंत्रलय भी उनके जिम्मे था. उनके पास खुद की सहायता के लिए कोई पूर्णकालिक राज्यमंत्री भी नहीं था. उनके मंत्रलय में स्वतंत्र प्रभार के रूप में योगदान देने वाली निर्मला सीतारमण की मुख्य जिम्मेवारी वाणिज्य मंत्रलय व कॉरपोरेट मंत्रलय की ही मानी जाती थी. सरकार के एक और बड़े मंत्री वेंकैया नायडू के पास तीन महत्वपूर्ण मंत्रलय हैं. ये हैं – संसदीय कार्य, शहरी विकास मंत्रलय व आवास व शहरी गरीबी उन्मूलन. वहीं, नितिन गडकरी के पास पांच मंत्रलय – सड़क परिवहन, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, जहाजरानी, जल एवं स्वच्छता हैं.
इसी तरह रविशंकर प्रसाद के पास कानून, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार जैसे तीन बड़े मंत्रलय हैं. प्रकाश जावड़ेकर के पास सूचना एवं प्रसारण मंत्रलय, वन एवं पर्यावरण मंत्रलय के अलावा संसदीय कार्य मंत्रलय के राज्यमंत्री की भी जिम्मेवारी है. पीयूष गोयल के पास कोयला, ऊर्जा व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रलय की जिम्मेवारी रही है. वहीं, नरेंद्र सिंह तोमर के पास स्टील व खनन मंत्रलय की जिम्मेवारी है.
मोदी सरकार के स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के पास भी कामकाज का काफी बोझ है. दूसरी बात यह कि उन्हें आवंटित मंत्रलय के चरित्र में भी भारी अंतरविरोध है. मसलन, जनरल वीके सिंह को विदेश मंत्रलय के साथ पूर्वोत्तर की जिम्मेवारी दी गयी है. संतोष गंगवार के पास कपड़ा मंत्रलय के अलावा संसदीय कार्य मंत्रलय, जल व नदी विकास जैसे विभागों की जिम्मेवारी है. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह के पास आश्चर्यजनक रूप से नौ विभागों का प्रभार है.
मोदी सरकार के राज्य मंत्रियों पर हालांकि अपेक्षाकृत काम का बोझ कैबिनेट व स्वतंत्र प्रभार वालों से कम है. लेकिन कुछ मंत्रियों को दो-तीन विभाग आवंटित किये गये हैं. विष्णुदेव साय, संजीव कुमार बलियान, उपेंद्र कुशवाहा ऐसे ही मंत्रियों में शुमार हैं.
बहरहाल, मोदी सरकार के रविवार के विस्तार के बाद इतना तो पक्का है कि शीर्ष मंत्रियों का भार हलका होगा. इसमें अरुण जेटली, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी शामिल हैं. इनके साथ ही रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, प्रकाश जावड़ेकर के कामकाज का बोझ भी सरकार कम करेगी. मोदी अपने नये कैबिनेट में विभागों के बंटवारे के माध्यम से कुछ राज्य मंत्रियों का बोझ हलका करेंगे. साथ ही 14 राज्यमंत्री बनाये जाने से स्पष्ट है कि अब ज्यादातर कैबिनेट मंत्रियों को उनका सहयोग करने के लिए अब राज्यमंत्री मिल जायेगा. मोदी के विस्तारित मंत्रिपरिषद में अब कुल 66 सदस्य हो गये. इसमें 27 कैबिनेट मंत्री, 13 स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री, 26 राज्य मंत्री हो गये हैं.
