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सामना में शिवसेना ने खुद को बताया शेर

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सामना में शिवसेना ने खुद को बताया शेर

मुंबई :अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि पार्टी चुनाव में शेर की तरह लड़ी. पार्टी ने जितनी भी सीटों पर जीत दर्ज की है वह सम्मानजनक है. चुनाव में शिवसेना अकेले मैदान में थी, पूरी सत्ता पार्टी के खिलाफ थी फिर भी हम लडे और जिस तरह के नतीजे आये हैं उसका सम्मान होना चाहिए.

गंठबंधन के संबंध में संपादकीय में लिखा गया है कि यदि सामने से प्रस्ताव आता है तो पार्टी समर्थन देने पर विचार करेगी. भाजपा पर हमला करते हुए लिखा गया है कि महाराष्‍ट्र में किसी को जनादेश नहीं मिला है कुछ पार्टियां अपनी जीत का डंका पीट रहीं हैं.

संपादकीय में कहा गया, ‘‘शिवसेना-भाजपा गठबंधन के टूटने और सभी सीटों पर चार-पांच कोणीय मुकाबले की वजह से भाजपा और यहां तक कि कांग्रेस-राकांपा को फायदा मिला. शिवसेना-भाजपा गठबंधन के टूटने से कांग्रेस -राकांपा को लाभ मिला.

लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए ये दोनों दल मिलकर 25 से ज्यादा सीटें भी नहीं जीत सकते.’’ इसमें कहा गया कि शिवसेना इस पर टिप्पणी नहीं करेगी कि वह वर्तमान परिणामों को किस तरह देखती है, क्योंकि ‘‘सभी शक्तिशाली मतदाताओं’’ की राय महत्वपूर्ण है जिन्होंने खंडित जनादेश दिया है.

संपादकीय में कहा गया है ‘‘चूंकि किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, इसलिए संदेह पैदा होता है कि अस्थिरता के चलते राज्य कैसे आगे बढेगा.’’

इससे पहले मतदान के परिणाम आने के बाद रविवार को महाराष्ट्र में दूसरी सबसे बडी पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आई शिवसेना ने राकांपा के भाजपा को बिना शर्त बाहर से समर्थन देने की घोषणा करने के बाद कहा कि वह राज्य में भाजपा नीत सरकार में शामिल होने को लेकर किसी दबाव में नहीं है.

शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने कहा, ‘‘बिल्कुल कोई दबाव नहीं है.’’ उनसे पूछा गया था कि क्या राकांपा के भाजपा को बाहर से समर्थन देने की घोषणा करने के बाद सरकार में शामिल होने को लेकर शिवसेना पर कोई दबाव है. राउत ने कहा कि पार्टी का भविष्य शीघ्र ज्ञात होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ बैठक हुई थी और हमारी भावी भूमिका शीघ्र ज्ञात हो जाएगी. क्या आज ही इसका साफ हो जाना जरुरी है.’’भाजपा के शानदार प्रदर्शन को हल्का करने का प्रयास करते हुए शिवसेना ने कहा, ‘‘हमारे पास सत्ता नहीं है, तंत्र नहीं है जो उनके पास थी. भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों ने चुनाव प्रचार किया.’’ उन्होंने कहा, ‘‘शिवसेना अकेले लडी लेकिन अच्छा लडी. हमें भाजपा से कुछ सीटें कम मिलीं लेकिन हमारी संख्या भी बढी है.’’

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