टेक्‍स्‍ट नहीं फिर भी 200 सालों से भारत में लागू हैं ये कानून

नयी दिल्‍ली : ऐसे कम से कम छह कानून हैं जो तकरीबन 200 साल से लागू हैं लेकिन उनका टेक्स्ट (पाठ्य भाग) आज किसी भी सरकारी विभाग के पास नहीं है जो संकेत देता है कि उनकी प्रासंगिकता समाप्त हो गई है. इनमें से एक कानून 1841 में बनाया गया था. इसलिए विधि आयोग ने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 15, 2014 4:55 PM

नयी दिल्‍ली : ऐसे कम से कम छह कानून हैं जो तकरीबन 200 साल से लागू हैं लेकिन उनका टेक्स्ट (पाठ्य भाग) आज किसी भी सरकारी विभाग के पास नहीं है जो संकेत देता है कि उनकी प्रासंगिकता समाप्त हो गई है. इनमें से एक कानून 1841 में बनाया गया था. इसलिए विधि आयोग ने अब सिफारिश की है कि इस तरह के कानूनों को अब समाप्त कर दिया जाना चाहिए.

सरकार को कानूनों पर कल सौंपी गयी अपनी दूसरी अंतरिम रिपोर्ट में आयोग ने कहा है कि चूंकि इनमें से ज्यादातर कानून भू-राजस्व से जुडे हैं इसलिए केंद्र को संबद्ध राज्यों को उन्हें समाप्त करने को कहना चाहिए. भू राजस्व राज्य का विषय है. चॉपिंग बोर्ड के पास भेजने के लिए जिन कानूनों की सिफारिश की गयी है उनमें से एक है बंगाल भू राजस्व विक्रय अधिनियम, 1841.

विधि आयोग ने संबद्ध राज्य के साथ सलाह-मशविरा करके इसे समाप्त करने की अनुशंसा की है. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, इस अधिनियम का टेक्स्ट विधि मंत्रालय की साइट या अन्य सहज स्रोत से उपलब्ध नहीं है, जो इस बात का संकेत है कि यह इस्तेमाल में नहीं है.

न तो कोई अन्य दस्तावेजी उदाहरण है जहां विगत कुछ दशकों में इस कानून का इस्तेमाल किया गया है. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस अधिनियम को इसलिए समाप्त कर दिया जाना चाहिए.