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Home National हज यात्रियों ने शैतान को मारा पत्थर, जानवरों की कुर्बानी दी

हज यात्रियों ने शैतान को मारा पत्थर, जानवरों की कुर्बानी दी

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हज यात्रियों ने शैतान को मारा पत्थर, जानवरों की कुर्बानी दी

मिना (सउदी अरब): हज के लिए यहां पहुंचे दुनिया भर के लाखों मुसलमानों ने रस्मी तौर पर मिना की पहाडी पर शैतान को आज दूसरे दिन भी कंकडियां मारीं तथा जानवरों की कुर्बानी दी. इसके साथ ही इस साल का हज आखिरी पडाव पर पहुंच गया.

शैतान को कंकडियां मारने की रस्म कल से शुरु हुई और इसमें बिना सिला हुआ सफेद कपडा (एहराम) पहने हज यात्रियों ने हिस्सा लिया. बहुत सारे हज यात्रियों ने शैतान को कंकडियां मारने की रस्म को आज पूरा किया.
हज यात्री शैतान को कंकडियां मारने के लिए ‘अल्ला हू अकबर’ :ईश्वर बडा है: बोलते हुए मिना घाटी पहुंचे. यह स्थान मक्का की प्रमुख मस्जिद ‘मस्जिद-अल हराम’ से करीब पांच किलोमीटर पूर्व में है. शैतान को कंकडियां मारने की रस्म बुराई को त्यागने और यह वादा करने का प्रतीक है कि शैतान की साजिशों में कभी नहीं पडना है.
इस परंपरा का अपना इतिहास है. इस्लाम के मुताबिक नबी इब्राहीम जब खुदा का हुक्म मानकर अपने इकलौती औलाद ईस्माइल की कुर्बानी देने जा रहे थे तो शैतान ने उन्हें बहलाने की कोशिश की जिसके बाद उन्होंने शैतान को कंकडियां मारी. हज पर आए लोग इसी का अनुसरण करते हैं और ऐसा करना हज से जुडी रस्मों में शामिल है.
इस बार हज के लिए भारत से 136,000 से अधिक भारतीय भी पहुंचे हैं. हज के लिए पूरी दुनिया से 20,85,238 लोग एकत्र हुए हैं. इनमें 13,89,053 विदेशी नागरिक और शेष स्थानीय हैं.
भारतीय हजयात्री अब भी मिना में अपने तंबुओं में मौजूद हैं. वे भी दूसरे हज यात्रियों के साथ आज दूसरे दिन शैतान को कंकडिया मारने के लिए पहुंचे. यह रस्म मंगलवार तक जारी रहेगी और उसी दिन इस साल का हज मुकम्मल हो जाएगा. हज से ठीक पहले मक्का पहुंचे भारतीय मदीना जाएंगे जहां पैगम्बर को इस दुनिया से विदा होने के बाद सुपुर्द-ए-खाक किया गया था. मक्का से मदीना के सफर को ‘हिजरत’ कहते हैं.
हज पूरा होने के साथ यहां से हज यात्रियों का अपने अपने देशों में लौटने का सिलसिला शुरु हो जाएगा. भारतीय हज यात्रियों के स्वदेश भेजने के लिए आखिरी उडान 10 नवंबर को परिचालित होगी.जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूत बीएस मुबारक ने कहा कि जमारात और मिना में सबकुछ अच्छे ढंग से चल रहा है.
मुबारक ने कहा, ‘‘अभी हमें किसी बडे मसले का सामना नहीं करना पडा है. अतीत के वर्षों से उलट इस साल लापता होने के कम मामले सामने आए हैं और अब तक ऐसे सिर्फ 20 मामलों की जानकारी मिली है.’’ उत्तर प्रदेश के अमरोहा से हज के लिए यहां पहुंचे मोहम्मद शाहिद कहते हैं, ‘‘यह बहुत सुखद अनुभव रहा है. ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं बदला हुआ इंसान हूं. जिंदगी को लेकर मेरा नजरिया बदल गया है और मैं एक निखरे हुए इंसान के तौर पर वापस जा रहा हूं.’’
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