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दिल्ली पुलिस में शामिल होगा मोबाइल ”एफएसएल” वाहन

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दिल्ली पुलिस में शामिल होगा मोबाइल ”एफएसएल” वाहन

नयी दिल्ली: घटनास्थल से त्वरित और सक्षम तरीके से फॉरेंसिक डेटा जुटाने के उद्देश्‍य से दिल्‍ली सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. सरकार ने दिल्‍ली पुलीस में दो मोबाइल फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) वाहनों को शामिल करने को हरी झंडी दे दी है.

दिल्ली सरकार के अधिकारी ने कहा, ‘ये सचल वाहन तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने में सक्षम होंगे और तब प्रशिक्षित फॉरेंसिक स्टाफ नमूने लेकर उन्हें रोहिणी प्रयोगशाला भेज सकते हैं.’उन्होंने कहा, ‘अधिकांश समय पुलिसकर्मी उचित रुप से नमूने लेने में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की तरह दक्ष नहीं होते. साक्ष्य को गलत ढंग से एकत्र किए जाने से जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है.’

अधिकारी के अनुसार इस तरह के दो और वाहनों को शामिल करने के लिए मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है.दिल्ली पुलिस ने पिछले साल हर पुलिस जिले के लिए एक-एक के हिसाब से इस तरह के 11 वाहनों का प्रस्ताव सौंपा था.ये वाहन 24 घंटे सातों दिन काम करेंगे और साक्ष्य जुटाने के लिए इनमें प्रशिक्षित फॉरेंसिक तकनीशियन तैनात रहेंगे.इस बीच, रोहिणी प्रयोगशाला का भार कम करने के लिए दिल्ली सरकार की तीन और फॉरेंसिक प्रयोगशाला बनाने की योजना है.

अधिकारी ने कहा, ‘दिल्ली की एकमात्र फॉरेंसिक प्रयोगशाला में स्टाफ की कमी है और इसे हर महीने करीब 500 नए नमूने मिलते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘रोहिणी प्रयोगशाला के स्टाफ के पास हमेशा काम का ज्यादा भार रहने की वजह से नमूने अक्सर राष्ट्रीय राजधानी से बाहर भेजने पडते हैं.’

अधिकारी ने कहा कि इसके अतिरिक्त खून, डीएनए और विसरा जैसे सबूतों की जांच छह महीने के अंदर करनी होती है जो पुलिस के लिए एक और बडी चुनौती है. साक्ष्य किसी भी जांच की रीढ होता है, और हत्या या बलात्कार के मामलों में साक्ष्य को जल्द से जल्द एकत्रित करना आवश्यक होता है.

उन्होंने कहा, ‘कई मामलों में वर्षों लग सकते हैं और अक्सर देखा गया है कि समय के साथ साथ गवाह गवाही से मुकर जाते हैं. मजबूत सबूत असल दोषी को पकडने में पुलिस की मदद करते हैं और इसलिए रोहिणी स्थित एफएसएल को उन्नत बनाने की तत्काल आवश्यकता है’.

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