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हिग्स बोसोन में इतनी ऊर्जा नहीं है कि ब्रह्मांड नष्ट हो

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नयी दिल्ली : गॉड पार्टिकल के विनाशकारी पहलू के बारे में विश्व विख्यात भौतिकशास्त्री स्टीफन हॉकिंग की आशंकाओं से कुछ वैज्ञानिक पूरी तरह से इत्तेफाक नहीं रखते और उनका कहना है कि हिग्स बोसोन में इतनीऊर्जानहीं है कि ब्रह्माड नष्ट हो जाए.

प्रो यशपाल ने कहा कि प्रो हॉकिंग ने निर्वात क्षय होने की आशंका जतायी है लेकिन इसके कारण ऐसा नहीं होगा कि ब्रह्मांड नष्ट हो जाये. उच्च शक्ति के ऊर्जा कणों को टकरा कर ही गॉड पार्टिकल की खोज की गयी है. इसके कई फायदे हैं जो आने वाले समय में काफी लाभकारी होंगे.
उन्होंने कहा, यह ब्रह्मांड को बर्बाद नहीं कर सकता. लार्ज हाइड्रान कोलाइडर प्रयोग आगे भी जारी रहना चाहिए. इससे खतरा नहीं है. इतनी ऊर्जा कहां से आयेगी ? यशपाल ने कहा कि उन्होंने (हाकिंग ने) ऐसा कैसे कहा है, यह तकनीकी विषय है, इसे स्पष्ट करने की जरूरत है.
मेलबर्न यूनिवर्सिटी के प्रो. एलन डफी ने कल अपने बयान में कहा था कि हॉकिंग तकनीकी रूप से सही हो सकते हैं लेकिन ब्रह्मांड को नष्ट करने के लिए जितनी ऊर्जा की जरुरत होगी, उतनी उर्जा हिग्स बोसोन में संभव नहीं दिखती है.
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भौतिकशास्त्री स्टीफन हॉकिंग ने आगाह किया था कि दो साल पहले वैज्ञानिकों ने जिस गॉड पार्टिकल की खोज की है उसमें समूचे ब्रह्मांड को नष्ट करने की क्षमता है. एक्सप्रेस डॉट को डॉट यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार हॉकिंग ने एक नयी किताब स्टारमस के प्राक्कथन में लिखा है कि अत्यंत उच्च ऊर्जा स्तर पर हिग्स बोसोन अस्थिर हो जाये तब इससे प्रलयकारी निर्वात क्षय की शुरुआत हो सकती है जिससे दिन और काल ढह जा सकते हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि भौतिकी के सिद्धांत के अनुसार, हिग्स बोसोन की मौजूदगी ने ही पदार्थ के कणों में द्रव्यमान पैदा किया। ब्रह्मांड की रचना ऐसे गॉड पार्टिकल के बिना संभव नहीं है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि गॉड पार्टिकल ने ही अलग अलग परमाणुओं को आपस में जोडकर नए पदार्थ के अनगिनत अणुओं को जन्म दिया और इन नये अणुओं ने आपस में जुडकर पदार्थो की रचना की. ब्रह्मांड और संपूर्ण सृष्टि का स्वरुप हमें जैसा नजर आता है, वह गॉड पार्टिकल की ही देन है.
उनका कहना है कि गाड पार्टिकल से अंतरिक्ष तकनीक को पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकेगा. इसकी मदद से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा बल्कि बिजली उत्पादन में भी मदद मिलेगी.
स्विटरलैंड और फ्रांस की सीमा पर स्थित कई किलोमीटर लंबी एक सुरंग में हिग्स बोसोन पर लार्ज हाइड्रान कोलाइडर प्रयोग चल रहा है जो यूरोपीय परमाणु शोध संगठन (सर्न) की टीम कर रही है जिसमें भारत समेत कई देशों के वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि बिग बैंग कहलाये जाने वाले महाविस्फोट के जरिये ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई होगी और इसी समय हिग्स बोसोन अस्तित्व में आया और इसी से पदार्थ एवं दूसरे कणों की रचना हुई होगी तथा आकाश गंगाओं और नक्षत्रों ने आकार लिया होगा. इसी वजह से इसको गॉड पार्टिकल नाम दिया गया.
बहरहाल, हॉकिंग का कहना है कि, हिग्स क्षमता की चिंताजनक विशिष्टता यह है कि यह 100 अरब गिगा इलेक्ट्रोन वोल्ट पर अत्यंत स्थिर हो सकती है. उनका कहना है कि इसका यह अर्थ हो सकता है कि वास्तविक निर्वात का एक बुलबुला प्रकाश की गति से फैल सकता है जिससे ब्रह्मांड प्रलयकारी निर्वात क्षय से गुजरेगा. हालांकि हाकिंग ने कहा कि इस तरह के प्रलय के निकट भविष्य में होने की उम्मीद नहीं है. लेकिन उच्च ऊर्जा में हिग्स के अस्थिर होने के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
सर्न के वैज्ञानिक का कहना है कि सृष्टि में हर चीज को कार्य करने के लिए द्रव्यमान होने की जरुरत होती है. अगर इलेक्ट्रानों में द्रव्यमान नहीं होता तब परमाणु नहीं होते और परमाणुओं के बगैर दुनिया में किसी चीज का सृजन करना संभव नहीं था. हिग्स बोसोन शोध इसी अवधारणा पर आधारित है.
पीटर हिग्स ब्रिटिश वैज्ञानिक हैं जबकि सतेंद्र नाथ बोस भारतीय वैज्ञानिक थे. इन्हीं दोनों के नाम पर इसे हिग्स बोसोन नाम दिया गया है.
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