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भारत-पाक शांति वार्ता के लिए मनमोहन सिंह ने मांगी थी मदद:यासिन मलिक

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भारत-पाक शांति वार्ता के लिए मनमोहन सिंह ने मांगी थी मदद:यासिन मलिक

।। सेंट्रल डेस्क ।।

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासिन मलिक ने संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन (यूपीए) सरकार को मुश्किल में डाल दिया है. साथ ही कश्मीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर रुख को लेकर शनिवार को उन पर कड़ा प्रहार किया.
मलिक ने कहा कि वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री यासीन मलिक ने भारत-पाक शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में उससे मदद मांगी थी और कहा था कि वह (मलिक) पाकिस्तान के आतंकवादियों से मिले. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर रुख के कारण भारत-पाक विदेश सचिव स्तर की वार्ता रुक गयी. इसके लिए सरकार कश्मीरी संगठनों को जिम्मेदार ठहरा रही है. यह गलत है.
कश्मीर की आजादी के समर्थक जेकेएलएफ चीफ ने कहा कि बातचीत रोक कर भारत सरकार कश्मीर के युवाओं को आतंकवाद की अंधी गलियों की ओर ढकेल रही है. उसने कहा कि कुछ नया नहीं हो रहा है. यदि डींग हांकना बंद कर दें, तो कुछ दिन बाद दोनों देश एक बार फिर वार्ता की तैयारी कर रहे होंगे. यदि सही ढंग से बातचीत को आगे बढ़ाया जाये, तो सारी समस्या का हल हो सकता है.
* लश्कर के गुर्गे को किया था संबोधित
मलिक ने इंडिया टीवी पर प्रसारित आप की अदालत में कहा, वर्ष 2006 में मैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला. मैंने उनसे कहा कि कश्मीर मुद्दे के हल के लिए वह उग्रवादी संगठनों को वार्ता में शामिल करें. प्रधानमंत्री ने इस कार्य में मुझसे मदद मांगी. मलिक ने कहा कि वह पाकिस्तान के आजाद कश्मीर में गया, तो लश्कर-ए-तैयबा के एक कैंप में गया, जहां इसके नेता हाफिज सईद ने एक सम्मान समारोह आयोजित किया.
मलिक ने कहा, मैंने वहां मौजूद लश्कर के गुर्गों को संबोधित किया था.जेकेएलएफ सरगना ने हालांकि यह नहीं बताया कि उसने मनमोहन सिंह के मदद मांगने पर आतंकी गुटों से संपर्क किया या नहीं. जम्मू-कश्मीर पर जेकेएलएफ की नीति के बारे में पूछने पर उसने कहा कि भारत कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता है, वह इसे अपना मुकुट मानता है, तो पाकिस्तान गले की हड्डी.
* हम कश्मीर की आजादी चाहते हैं
मलिक ने कहा कि हमारी पार्टी की राय है कि कश्मीरियों को अपनी किस्मत का फैसला करने का हक मिलना चाहिए. हम आजादी चाहते हैं.ह्ण यासीन ने मोदी सरकार की यह दलील खारिज कर दी कि भारत-पाक विदेश सचिव स्तर वार्ता रुकने के लिए अलगाववादी जिम्मेदार हैं. कहा कि पाक के अफसरों से कश्मीरी नेताओं की भेंट 24 साल पुरानी परिपाटी है. जब भी उनके पीएम या विदेश सचिव भारत आते थे, हम मिलते थे. यह कहना गलत है कि हमने शांति प्रक्रिया में पलीता लगाया. उल्टे, हम शांति प्रक्रिया मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि सभी पक्ष अपनी राय रख पाये. हम तीसरा पक्ष नहीं हैं.
* कश्मीर में हम तैयार हैं : मलिक ने कहा, प्रधानमंत्री हमें कोई कूटनीतिक या राजनीतिक जगह नहीं दे रहे हैं. चूंकि मोदी ने कट्टर रुख अपनाने का निर्णय लिया है, तो कश्मीर में हम तैयार हैं. हम अपना आंदोलन मजबूत करेंगे.मलिक ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह और मीरवाइज उमर फारूक के साथ दिल्ली के ऐतराज के बाद भी पाकिस्तान के उच्चायोग से भेंट की थी. इसके बाद भारत ने 25 अगस्त को इसलामाबाद में होनेवाली भारत-पाक विदेश सचिव स्तर वार्ता रद्द कर दी.
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