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Home National दिल्ली चुनाव में भाजपा की हार पर RSS की नसीहत, कहा- मोदी और शाह हमेशा जीत नहीं दिला सकते

दिल्ली चुनाव में भाजपा की हार पर RSS की नसीहत, कहा- मोदी और शाह हमेशा जीत नहीं दिला सकते

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दिल्ली चुनाव में भाजपा की हार पर RSS की नसीहत, कहा-  मोदी और शाह हमेशा जीत नहीं दिला सकते
नयी दिल्लीः दिल्ली चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की करारी शिकस्त के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने सलाह दी है कि बीजेपी को दिल्ली में संगठन का पुनर्गठन करना चाहिए. आरएसएस के अंग्रेजी मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ ने दीन दयाल उपाध्याय को कोट करते हुए दिल्ली चुनाव में भाजपा की हार की समीक्षा छापी है और भाजपा, पार्टी की दिल्ली इकाई और चुनाव में उतारे गए उम्मीदवारों के बारे में विस्तार से अवलोकन छापा है.
लेख में जोर देकर यह कहा है गया है कि एक संगठन के तौर पर भाजपा को यह समझने की जरूरत है कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी हमेशा मदद नहीं कर सकते. लेख में कहा गया है, नरेंद्र मोदी और अमित शाह विधानसभा स्तर के चुनावों में हमेशा मदद नहीं कर सकते हैं और स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए दिल्ली में संगठन के पुनर्निर्माण के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
बता दें कि दिल्ली में लगातार दूसरी बार भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है. हालांकि सीटों की संख्या बढ़कर 3 से 8 जरूर पहुंच गयी. वहीं, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी 70 में से 62 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता पर कब्जा बरकरार रखा.
आरएसएस ने ‘ऑर्गेनाइजर’ में लिखा, 2015 के बाद भाजपा की जमीनी स्तर पर खुद की ढांचागत व्यवस्था को पुनर्जीवित करने और चुनाव के आखिरी चरण में प्रचार-प्रसार को चरम पर ले जाने में दिखाई पड़ रही नाकामी अच्छी तरह लड़े गए चुनाव में मिली विफलता के दो सबसे बड़े कारण रहे. दीनदयाल उपाध्याय का संदर्भ देते हुए अखबार ने लिखा है कि बुराई हमेशा बुराई रहेगी.
आर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने लिखा है कि दिल्ली जैसे बड़े शहर जैसे राज्य में मतदाताओं के व्यवहार को समझने की जरूरत है. भाजपा द्वारा उठाया गया शाहीन बाग का मुद्दा फेल हो गया, क्योंकि केजरीवाल ने इस पर स्पष्ट रुख साफ कर दिया. इसके साथ ही केतकर ने भाजपा को केजरीवाल के नए ‘भगवा अवतार’ के लिए चेताया और कहा कि इस पर नजर रखने की जरूरत है.
दिल्ली डायवर्जेंट मेंजेट’ शीर्षक से लिखे इस आर्टिकल में दिल्ली में सिटी स्टेट के वोटिंग बिहेवियर को समझने पर जोर दिया गया है.
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