धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव, सुप्रीम कोर्ट आज तय करेगा बहस के लिए मुद्दे
नयी दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट विभिन्न धर्मों में और केरल के सबरीमला मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के बारे में चर्चा के लिए आज मुद्दे तय करेगा. नौ जजों की संविधान पीठ मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाउदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिलाओं का खतना और गैर पारसी पुरूषों से शादी […]
नयी दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट विभिन्न धर्मों में और केरल के सबरीमला मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के बारे में चर्चा के लिए आज मुद्दे तय करेगा. नौ जजों की संविधान पीठ मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाउदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिलाओं का खतना और गैर पारसी पुरूषों से शादी कर चुकी पारसी महिलाओं के पवित्र अग्नि स्थल में प्रवेश पर रोक से संबंधित मुद्दों पर विचार करेगी.
A nine-judge Bench of the Supreme Court will today hear and examine the #Sabarimala temple matter & frame the questions in the case. The Court will also hear the scope of judicial review on the point of religious faith and women's rights. pic.twitter.com/2kEoDx3Tdm
— ANI (@ANI) February 3, 2020
पिछले साल 14 नवंबर को वृहद पीठ के पास इस मामले को भेजते हुए पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि उपासना स्थल पर महिलाओं और लड़कियों के प्रवेश पर पाबंदी जैसे धार्मिक रीति रिवाजों की संवैधानिक वैधता पर बहस सिर्फ सबरीमला तक सीमित नहीं है.
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े के अलावा, पीठ में न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति एम एम शंतनगौदार, न्यायमूर्ति एस ए नजीर , न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्याकांत शामिल हैं. शीर्ष न्यायालय ने 13 जनवरी को चार वरिष्ठ वकीलों से कहा था कि वे इस विषय में चर्चा किए जाने वाले मुद्दों पर फैसले के लिए एक बैठक आयोजित करें.
