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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत बने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत बने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

नयी दिल्ली : सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को सोमवार को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया गया. सीडीएस का काम सेना, नौसेना और वायुसेना के कामकाज में बेहतर तालमेल लाना होगा. सरकारी आदेश के मुताबिक, सीडीएस के पद पर जनरल रावत की नियुक्ति 31 दिसंबर से प्रभावी होगी.

जनरल रावत ने 31 दिसंबर 2016 को सेना प्रमुख का पद संभाला था. वह मंगलवार को सेवानिवृत्त हो रहे थे. सेना प्रमुख बनने से पहले उन्होंने पाकिस्तान से लगी नियंत्रण रेखा, चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा और पूर्वोत्तर में विभिन्न संचालनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके थे. सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पिछले मंगलवार को सीडीएस का पद बनाये जाने को मंजूरी दी थी जो तीनों सेनाओं से जुड़े सभी मामलों में रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करेगा. गौरतलब हैकि बिपिन रावत के इस पद पर नियुक्ति की चर्चा काफी जोरों पर थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त के भाषण के अवसर पर इस पद का एेलान किया था. तभी से चर्चा चल रही थी कि इस पद पर बिपिन रावत की नियुक्ति होगी.

सीडीएस 65 साल की उम्र तक अपने पद पर रह सकते हैं. सीडीएस की नियुक्ति को लेकर विभिन्न समितियों ने सिफारिश की थी. इन्हीं को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने यह फैसला किया है. रक्षा मंत्रालय ने सीडीएस के 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा तक सेवा देने के वास्ते नियमों में संशोधन किया है. यदि तीनों सेनाओं के प्रमुख में से किसी को इस पद पर नियुक्त किया जाता है तो चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की अधिकतम आयु 65 वर्ष करने के लिए सेवानिवृत्ति आयु में विस्तार करने के लिए सेना, नौसेना और भारतीय वायुसेना के सेवा नियमों में बदलाव किये गये हैं. केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने जनरल रावत को सीडीएस बनाये जाने पर उन्हें पर बधाई दी है. सामाजिक न्याय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के मुताबिक, बिपिन रावत को इस पद पर नियुक्त किया गया है.

सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति ने मंगलवार को ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सीडीएस के सृजन को मंजूरी प्रदान की थी जो तीनों सेनाओं से संबंधित सभी मामलों के लिए रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करेंगे. नियमों के अनुसार, सैन्य प्रमुख अधिकतम तीन साल या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले आये, सेवा कर सकते हैं. सीडीएस, पद छोड़ने के बाद किसी भी सरकारी पद को ग्रहण करने के पात्र नहीं होंगे. अधिकारियों ने बताया कि सीडीएस का मुख्य कार्य संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए सैन्य कमानों का पुनर्गठन करना, साथ ही संयुक्त/थियेटर कमान के गठन के माध्यम से अभियानों को संयुक्त रूप से चलाना होगा. उन्होंने कहा कि तीन वर्षों के अंदर तीनों सेनाओं के अभियानों, साजो-सामान, परिवहन, प्रशिक्षण, सहायक सेवाओं, संचार, देखभाल और मरम्मत को संयुक्त करना सीडीएस का एक अन्य प्रमुख कार्य होगा.

साइबर और अंतरिक्ष से जुड़े तीनों सेनाओं की एजेंसियों, संगठनों और कमान सीडीएस के तहत आयेंगे और वह नाभिकीय कमान प्राधिकरण के सैन्य सलाहकार के तौर पर भी काम करेंगे. चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) की बैटन सौंपने को लेकर आयोजित किये जाने वाले पूर्व निर्धारित समारोह को शुक्रवार को रद्द कर दिया गया था. इस समारोह में 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को यह बैटन नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह को सौंपनी थी. थलसेना, वायुसेना और नौसेना के प्रमुख चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के सदस्य होते हैं और इनमें से वरिष्ठतम अधिकारी को सीओएससी का अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है.

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