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स्कूलों में ई-सिगरेट के उपयोग पर रखें कड़ी नजर

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स्कूलों में ई-सिगरेट के उपयोग पर रखें कड़ी नजर

नयी दिल्ली : ई-सिगरेट और इसी तरह के अन्य उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ ही दिन बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा और सारक्षरता विभाग से कहा है कि वे शिक्षण संस्थानों में ऐसे उत्पादों की उपलब्धता और इस्तेमाल पर नजर रखें. केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर अध्यादेश के प्रावधानों को लागू करने के लिए कदम उठाने को कहा है.

सूत्रों ने बताया कि यह मानते हुए पुलिस उपनिरीक्षकों को अध्यादेश के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिए समुचित कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है, सूदन ने हाल ही में हुई एक वीडियो कांफ्रेंस में पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों से अध्यादेश लागू करने के लिए विशेष क्रियान्वयन अभियान चलाने को कहा, सूत्रों ने बताया कि उनसे कहा गया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि छात्रों के बस्ते में ई-सिगरेट या ऐसा कोई उत्पाद ना हो, उनके बैगों की जांच की जा सकती है.
ईलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर प्रतिबंध (उत्पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, विक्रय, विरतण, भंडारण और विज्ञापन) अध्यादेश, 2019 को सरकार ने 18 सितंबर को जारी किया था. इसके तहत ई-सिगरेट या ऐसे ही किसी अन्य उत्पाद के उत्पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, विक्रय, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगा दिया गया.
साथ ही इसका उल्लंघन करने वालों के लिए सजा (जेल और जुर्माना, या दोनों) का प्रावधान किया गया . अध्यादेश के अनुसार, पहली बार इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों को अधिकतम एक वर्ष कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. एक से ज्यादा बार यही अपराध करने वालों के लिए अधिकतम तीन वर्ष कारावास और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों सजा का प्रावधान है. ई-सिगरेट का भंडारण भी अब दंडनीय अपराध है.
ऐसा करने वालों को अधिकतम छह माह कैद की सजा, 50,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकता है. केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव सूदन ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव से कहा है कि वे सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों में ई-सिगरेट की उपलब्धता या इस्तेमाल के संबंध में चौकन्ना रहने के लिए कहे. अपने पत्र में सूदन ने कहा है कि यह ध्यान में रखते हुए कि बेहद दिलचस्प दिखने वाले इन उत्पादों के बहकावे में बच्चे, किशोर और युवा आते हैं, उन्हें ऐसे उत्पादों और उपकरणों के प्रतिकूल प्रभावों.. नुकसानों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है.
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