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वर्मा समिति की रिपोर्ट में सीसैट पैटर्न जारी रखने की सिफारिश !

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वर्मा समिति की रिपोर्ट में सीसैट पैटर्न जारी रखने की सिफारिश !

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा में सिविल सर्विस एप्टीट्यूड टेस्ट यानी सीसैट प्रणाली को लेकर आज शुक्रवार को भी सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका. सरकार के पास पहले एक बहाना था कि इसके लिए समिति गठित की गयी है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही इस बारे में कुछ ठोस निर्णय लिया जा सकेगा. किन्तु वर्मा समिति ने कल गुरुवार को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इसके बावजूद सरकार ने आज राज्यसभा में इसके बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की. राज्यसभा में इस मुद्दे को लेकर आज जोरदार हंगामा भी हुआ. इसके बावजूद सरकार कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पायी. आखिर मोदी सरकार की क्या मजबूरियां हैं कि वह इस मुद्दे पर टालमटोल का रवैया अपना रही है

पढें सीसैट को लेकर मौजूदा हालात और जानकारों के विचार-

मौजूदा हालात, रिपोर्ट में सीसैट में बदलाव की सिफारिश नहीं
सीसैट को लेकर मौजूदा स्थिति यह है कि वर्मा कमिटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है. इसको आज शुक्रवार को भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर समिति ने रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की है. किन्तु सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के अनुसार समिति ने सीसैट को समाप्त करने या उसमें बदलाव किये जाने की सिफारिश अपनी रिपोर्ट में नहीं किया है. साथ ही यह भी खबर है कि यूपीएससी की पीटी परीक्षा तय तारीख अर्थात 24 अगस्त को ही होगी. हालांकि रिपोर्ट के बारे में सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. सूत्रों के हवाले से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक आज शुक्रवार को रात करीब 8 बजे सरकार की छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई. इस बैठक में कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के अलावा जेपी नड्डा व राम माधव भी शामिल थे. बैठक में जितेंद्र सिंह ने कहा कि रविवार तक इस संबंध में फैसला ले लिया जाएगा.

क्या जिम्मेवारी सौंपी गयी थी वर्मा समिति को
तीन सदस्यीय वर्मा समिति का गठन यूपीएससी परीक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव के विभिन्न पहलुओं को देखने के लिए किया गया था. अरविंद वर्मा को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया. इस समिति का गठन तब किया गया जब सीसैट को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी था. समिति को 31 जुलाई तक रिपोर्ट देने को कहा गया था. उस बीच रिपोर्ट आने तक पीटी परीक्षा को स्थगित रखने का निर्णय किया गया था किन्तु बीच में ही यूपीएससी ने 24 जूलाई को अपने वेबसाइट में एडमिट कार्ड जारी कर दिया. अरविंद वर्मा ने गुरुवार 31 जुलाई को केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी.
क्या है सरकार की मजबूरियां
सरकार के सामने आखिर क्या मजबूरी है कि यह खुलकर इस मामले पर कुछ नहीं बोल रही है. कार्मिक मामलों के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह कहते हैं कि एक सप्ताह के अंदर मामले को सुलझा लिया जाएगा. वह एक सप्ताह कल बीत चुका है. दूसरी ओर गृह मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि हम सीसैट मामले को लेकर कोई समयसीमा तय नहीं कर सकतें, हो सकता है कुछ और समय लगे. वहीं प्रकाश जावेडकर का कुछ और बयान आता है. वैंकेया नायडू कहते हैं कि प्रधानमंत्री स्वंय इस पर रुचि ले रहें हैं. तो आखिर सरकार के बयानों में एकरुपता क्यों नहीं है?
प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इस मामले में चुप क्यों है
सीसैट को लेकर छात्रों के विरोध के शुरुआती समय में ही जितेन्द्र सिंह ने कहा था कि हमने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है. उन्होंने कहा है कि हिन्दी की उपेक्षा नहीं होगी और एक सप्ताह के अंदर मामले को सुलझा लिया जाएगा. वहीं इधर वैंकेया नायडू ने इसी सप्ताह कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इस मामले पर रुचि ले रहें हैं. तो सवाल है कि चुनाव के दौरान लगातार घंटों बोलने वाले मोदी के पास देश के इतने बडे मामले के लिए दो शब्द बोलने का समय नहीं है. आखिर वे खुद इस मामले में कोई खास प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहें हैं. एक गरीब के दुःख पर आह भरने वाले मोदी को क्या राजधानी में ही पुलिस के तांडव का शिकार होती भूखे, सड़क पर बैठे छात्रों का दर्द नहीं दिख रहा है.
आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस का कहर क्या रामदेव बाबा वाली घटना नहीं दर्शाती
जब कांग्रेस ने रामलीला मैदान में धरना पर बैठे रामदेव व अन्य प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कहर बरपाया था तो भाजपा ने चीख-चीख कर कहा था कि यह सरकार का अन्याय है. लेकिन वहीं अब उनकी सरकार में शांति-पूर्वक अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे छात्रों पर पुलिसिया कहर बरपाया जा रहा है. कल पुलिस ने धरना पर बैठे छात्रों को जबरन अनशन से हटाया. इसके पहले भी चैनलों में दिखाया गया है कि किस तरह पुलिस ने छात्रों को खदेड-खदेड कर पीटा है.
सीसैट को लेकर आज सदन में क्या हुआ
अभी भी राज्यसभा में सरकार की ओर से आश्वासन का दौर जारी है. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में कहा, सरकार यूपीएससी परीक्षा के भाषा से संबंधित मुद्दे का उचित समाधान जल्द ढूंढ निकालेगी. उन्होंने कहा, सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन को गंभीरता से लिया है. हमें इस मामले से संबंधित समिति की रिपोर्ट प्राप्त हुई है और हम इसका अध्ययन कर रहे हैं.
विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया रही
राजनाथ के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम मोर्चे ने सदन से बहिष्कार किया. इससे पहले सदन को तीन बार स्थगन का सामना करना पड़ा था. हंगामे की वजह से उच्च सदन में प्रश्नकाल नहीं हो पाया. सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति हामिद अंसारी ने प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा कि, लेकिन तभी कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, जेडीयू के शरद यादव और सपा के नरेश अग्रवाल ने सी-सैट का मुद्दा उठाया.
तिवारी ने कहा कि यूपीएससी की परीक्षा देने वाले छात्र पिछले कुछ दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, उल्टे उन पर पुलिस ने लाठियां बरसाई.
सवाल है कि आखिर कब तक छात्र अपनी मांग को लेकर आंदोलन करते रहेंगे और सरकार कब इसपर निर्णय लेगी? आखिर कौन सी राजनीतिक मजबूरी है सरकार की और अगर है तो वह आश्वासन क्यों दे रही है? क्या इसमें सरकार में ही आपसी सहमति नहीं है? ऐसे ढेरों सवाल हैं जिसके जवाब के लिए भूखे-प्यासे छात्र अभी भी आश लगाये बैठें हैं.

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