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Home National सीवर की सफाई करते हुए काल के गाल में समाए 620 सफाईकर्मी, इस राज्य में सबसे ज्यादा

सीवर की सफाई करते हुए काल के गाल में समाए 620 सफाईकर्मी, इस राज्य में सबसे ज्यादा

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सीवर की सफाई करते हुए काल के  गाल  में समाए 620 सफाईकर्मी,  इस राज्य में सबसे ज्यादा

नयी दिल्ली: समाज कल्याण एवं विकास राज्यमंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि साल 1993 से लेकर अब तक देशभर के तकरीबन 15 राज्यों में सीवर सफाईकर्मियों की मौत के 620 मामले सामने आये हैं. इनमें तमिलनाडू 144 मौतों के साथ पहले नंबर पर है जबकि 131 के आंकड़े के साथ गुजरात दूसरे और 75 सफाईकर्मियों की मौत के साथ कर्नाटक तीसरे स्थान पर है.

इन राज्यों से भी सामने आये आंकड़े
इनके अलावा सीवर की सफाई के दौरान मौत के मामले उत्तर प्रदेश(71), हरियामा (51), राजस्थान (33), पंजाब (30), दिल्ली (28), पश्चिम बंगाल (18), उत्तराखंड (9), आंध्र-प्रदेश (08), तथा छत्तीसगढ़ और चंडीगढ़ (04) से भी सामने आये हैं.रामदास अठावले ने ये भी बताया कि इन 620 मामलों में केवल 445 मामलों में ही मृतक सफाईकर्मी के परिवार को पूरा मुआवजा मिला. इस दौरान 58 मामलों में मृतक के परिजनों को मुआवजे का आंशिक भुगतान किया गया जबकि 117 मामले अब भी लंबित है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था अहम निर्देश
जानकारी के मुताबिक साल 2014 में देश के उच्चतम न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों की सरकारों को ये निर्देश दिया था कि वो साल 1993 से लेकर अब तक सीवर अथवा सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सफाईकर्मियों की मौत का आंकड़ा इकट्ठा करे. सुपीर्म कोर्ट ने राज्यों को ये भी निर्देश दिया था कि वो मामले में मृतक के परिवारवालों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दे.
आपको बता दें कि साल 2013 के कानून के मुताबिक मैला ढोने का कार्य कराना निषिद्द है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिलाधिकारी समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को ये निश्चित करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति मैला ढोने का काम करता हुआ न पाया जाये. हालांकि स्थिति इसके ठीक उलट है.
नियमित तौर पर मैला ढोना अब भी जारी
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुआ रामदास अठावले ने बताया कि, साल 2013 से लेकर 2019 के बीच नियमति तौर पर मैला ढोने वाले लोगों के 53, 598 मामले सामने आये. जब पूछा गया कि, क्या इन मामलों में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हुयी तो रामदास अठावले ने कहा कि किसी भी राज्य अथवा केंद्र शाषित प्रदेश से इन मामलों में कार्रवाई करने से संबंधित कोई आंकड़ा नहीं आया है.
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