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दिल्‍ली की बिजली गुल!

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दिल्‍ली की बिजली गुल!

नयी दिल्लीः दिल्ली में बिजली के दाम में बढोत्तरी कर दी गयी है. बिजली के दाम में 8.32 फीसदी का इजाफा किया गया हैं. इस बढ़त के बाद अब 800 से 1200 यूनिट तक खपत करनेवाले उपभोक्ताओं को 8 रुपये दस पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से दाम देने होंगे. डीईआरसी ने गुरुवार को बिजली के दामों में इजाफा करने के पीछे तर्क दिया कि ऐसा कोयला के दाम में बढ़ोतरी की वजह से किया गया है. 0 से 200 यूनिट तक खर्च करने वालों को अब 4 रुपये प्रति यूनिट देने होंगे. पहले यह दर 3.90 रुपये थी.

बिजली पर होती रही है राजनीति

दिल्ली की बिजली कंपनियां कब से बिजली के दाम बढ़ाना चाहती थी, लेकिन चुनाव के कारण बिजली के दाम बढ़ने से रोक दिया गया था. इससे पहले अरविंद केजरीवाल और बिजली कंपनियों के बीच विवाद काफी बढ़ गया था. सत्ता में आने से पहले भी केजरीवाल ने बिजली को लेकर कई बार आंदोलन किया और लोगों से बढ़ी हुई बिजली दर ना देने का आग्रह भी किया था. इसके अलावा कई घरों में बिजली के तार जोड़ते हुए और बिजली के खंभों पर चढ़ते हुए केजरीवाल ने अपने आंदोलन को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया था. दिल्ली में सत्ता हासिल करने के बाद केजरीवाल ने बिजली कंपनियों की ऑडिट के आदेश भी दिये थे.

राजनीति के बावजूद भी बढ़ती हैं कीमतें

भाजपा ने अपने चुनावी वादे में आम जनता को अच्छे दिनों के सपने दिखाये थे. आज दिल्लीवाले को यह सुंदर सपना टूटता नजर आ रहा है. दिल्ली में केंद्र सरकार के शासन के बावजूद दिल्ली वालों को बढ़ती कीमतों से रिश्ता खत्म नहीं हुआ है. आज दिल्लीवालों को बिजली के दाम में हुई बढोत्तरी से एक जोरदार झटका लगा है. राजनीतिक पार्टियां आरोप प्रत्यारोप में लग गयीं है. कांग्रेस बढ़े हुए बिजली के दाम के लिए भाजपा और आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहरा रही है तो आम आदमी पार्टी के पास राजनीतिक हमले के लिए एक नया मुद्दा मिल गया है.कांग्रेसी नेता अरविंद सिंह लवली ने बिजली बढोत्तरी पर कहा, यह बहुत तकलीफदेह है.जनता पर बोझ बढ़ा दिया गया है.

कांग्रेस के समय दी गई सब्सिडी को भी हटा दिया गया. केजरीवाल दिल्ली को बीच में छोड़कर चले गये. दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपना वादा नहीं निभाया उन्होंने वादा किया था कि 30 पर्सेंट दाम कम करेंगे. भाजपा को अपना वादा पूरा करना चाहिए. केजरीवाल ने पहले ही भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था, ऐसा जान पड़ता है कि पिछली कांग्रेस सरकार की तरह भाजपा का भी विद्युत वितरण कंपनियों के साथ साठगांठ है, यही वजह है कि वह बिजली मुद्दे का हल नहीं कर पा रही है’’ उन्होंने कहा कि शहर के कई इलाकों में बिजली की कटौती हो रही है और पानी की कमी है जिससे लोगों में केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी है. अब बिजली के दाम में हुई बढोत्तरी के बाद विरोधियों के बैठे बैठाये एक मुद्दा मिल गया है. इस राजनीतिक उठा पटक के बीच बिजली पर बढ़ती राजनीति के बीच भी दिल्ली वालों को राहत नहीं मिली.

बिजली के दाम बढ़ने का क्या है कारण

दिल्ली की जनता पहले ही बिजली के कटौती से परेशान थी. अब बिजली की बढोत्तरी को लेकर डीईआरसी के चेयरमैन पीडी सुधाकर ने सफाई पेश की है. गुरुवार को बढ़ी कीमतों के एलान के बाद इसके कारण को भी स्पष्ट रुप से सबके सामने रख दिया गया. बिजली के दामों में इजाफा करने के पीछे तर्क दिया कि ऐसा कोयला के दाम में बढ़ोतरी की वजह से किया गया है. लेकिन हो सकता है कि आपका बिजली का बिल कम आए क्योंकि पावर परचेज अजस्टमेंट चार्ज हटा दिया गया है. इसका मतलब है कि अब कंपनियों को अगर बिजली खरीदने में कम या ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं तो उसका आपके बिल पर कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन यह चार्ज सिर्फ तीन महीने तक था, तो बिल तीन महीने तक ही कम आएगा. कोयले की कीमत में हुई बढोत्तरी का असर बिजली पर दिखा.

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