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Home National कठुआ मामले में मुजरिमों को फांसी की सजा नहीं सुनाये जाने पर निराशा हुई : महिला आयोग अध्यक्ष

कठुआ मामले में मुजरिमों को फांसी की सजा नहीं सुनाये जाने पर निराशा हुई : महिला आयोग अध्यक्ष

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कठुआ मामले में मुजरिमों को फांसी की सजा नहीं सुनाये जाने पर निराशा हुई : महिला आयोग अध्यक्ष

नयी दिल्ली/इंदौर : राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सोमवार रात कहा कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सामूहिक बलात्कार के बाद आठ वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले में सुनाये गये अदालती फैसले के बाद उन्हें निजी तौर पर थोड़ी निराशा हुई, क्योंकि वह मुजरिमों को फांसी की सजा सुनाये जाने की उम्मीद कर रही थीं.

पठानकोट की एक अदालत ने इस मामले के तीन मुख्य मुजरिमों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी, जबकि साक्ष्य नष्ट करने के जुर्म में तीन अन्य लोगों को पांच-पांच वर्ष कैद की सजा सुनायी. इस फैसले के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा, मैं हालांकि न्यायपालिका के फैसले पर टिप्पणी नहीं करूंगी, क्योंकि वह मुझसे ज्यादा कानून जानती है.

लेकिन मेरे लिये यह स्थिति थोड़ी निराशाजनक है क्योंकि मुझे लगता था कि मामले के मुजरिमों को फांसी की सजा सुनायी जायेगी. उन्होंने कहा कि कठुआ मामले का फैसला छोटी बच्चियों के खिलाफ लैंगिक अपराध रोकने के लिये नजीर का काम कर सकता था. आने वाले समय में इस निर्णय को देखते हुए अदालती फैसले सुनाये जा सकते थे.

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा, मुझे उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बाद बनने वाली सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहेगी और कठुआ मामले को ऊपरी अदालत में ले जायेगी. शर्मा ने यह भी कहा, कुछ लोग कठुआ मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं. मैं स्पष्ट करना चाहूंगी कि आयोग को जम्मू-कश्मीर के मामलों में किसी भी तरह के दखल का अधिकार नहीं है.

अलीगढ़ के टप्पल में ढाई वर्षीय बच्ची की नृशंस हत्या को बेहद भयावह वारदात बताते हुए उन्होंने कहा, इस मामले को देखकर मुझे लगता है कि मानवता कहीं पीछे छूट गयी है. वारदात के आरोपियों के खिलाफ उचित जांच के बाद फास्ट ट्रैक अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिये और मुजरिमों को फांसी की सजा सुनायी जानी चाहिये.

शर्मा ने एक सवाल पर कहा कि छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों को सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिये, क्योंकि भारतीय परंपरा के मुताबिक बेटियां सबकी सांझी होती हैं.

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