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बीकानेर के युवाओं को मोदी सरकार में आस्था, लेकिन बेरोजगारी चिंता का विषय

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बीकानेर के युवाओं को मोदी सरकार में आस्था, लेकिन बेरोजगारी चिंता का विषय

बीकानेर: बीकानेर में एक कोचिंग संस्थान के बाहर बैठे 18 से 25 साल की उम्र के रोजगार पाने के इच्छुक युवाओं के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर हो रही चर्चा में बेरोजगारी का मुद्दा एक आम विषय हो गया है और महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनावी भाषणों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठ रहा है. नेशनल कॅरियर सर्विस (एनसीएस) द्वारा उपलब्ध आंकड़े के अनुसार सिर्फ बीकानेर में ही करीब 14,000 पंजीकृत बेरोजगार हैं.

हालांकि नौकरी पाने की इच्छा रखने वाले कई युवाओं का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में वापसी करनी चाहिए और सिर्फ रोजगार सृजन ही भाजपा सरकार के प्रदर्शन का पैमाना नहीं होना चाहिए.

सुखदेव सिंह (18) भारत में नौकरियों की कमी के जिक्र पर बेपरवाही से अपना कंधा उचकाते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि देश को आखिर मोदी जरूरी क्यों है. सिंह कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.

उन्होंने बताया, ‘तो क्या हुआ अगर नौकरियां नहीं हैं? एक अकेला आदमी क्या-क्या कर सकता है? और मोदीजी ने तो फिर भी देश के लिये बहुत कुछ किया है. ऐसा नहीं है कि नौकरियां नहीं हैं। जो मेहनत से पढ़ेगा उसके लिये नौकरी पाना मुश्किल नहीं है.”

एनसीएस के अनुसार मार्च 2019 तक राजस्थान में करीब छह लाख बेरोजगार हैं और नौकरी की भर्तियां केवल 27,920 ही हैं. सिंह बीकानेर के पास कोलायत में छह मई को पहली बार मतदान करेंगे. उन्होंने कहा, ‘आज देश को दुनिया में पहचान मिली है और कांग्रेस के 70 साल की तुलना में पिछले पांच साल में कहीं अधिक विकास हुआ है.’ अमित चौधरी (19) ने भी सिंह की बातों पर सहमति जतायी.

चौधरी ने कहा, ‘कौन कहता है कि रोजगार नहीं है और नौकरियां कम हैं? इस वक्त तो काफी नौकरियां हैं और कई रोजगारों का सृजन होने वाला है। जहां तक मुझे मालूम है, कोई भी मोदीजी को सत्ता में वापसी से रोक नहीं सकता है. और उनका मुकाबला कौन करने जा रहा है?”
सांवरलाल भार्गव का मानना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण नौकरी पाना मुश्किल हो गया है. भार्गव का मानना है कि मोदी सरकार को एक और मौका मिलना चाहिए क्योंकि ‘‘कुछ अच्छा करने के लिये समय चाहिए.’ दूसरी ओर 20 वर्षीय बनवारी लाल जयानी की मोदी सरकार में उतनी आस्था नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं मानता कि मोदी सरकार में कोई बहुत विकास हुआ है. जीडीपी दर देखिये, 2014 से इसमें बमुश्किल बदलाव आया है.” जयानी भी एसएससी की तैयारी करते हैं. उनके छह भाई-बहन हैं जिनमें चार अभी नौकरी की तलाश में हैं. जयानी ने शिक्षा और केंद्र तथा राज्य सरकार की नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिये 10 प्रतिशत आरक्षण के केंद्र के फैसले पर नाखुशी जतायी.

उन्होंने कहा, ‘मुझे समझ नहीं आता कि सामान्य वर्ग को आरक्षण क्यों दिया जा रहा है. आप बताइये अगर कोई व्यक्ति हर महीने 65,000 रुपये कमाता है तो वह गरीब कैसे है?’ जिन लोगों की आय आठ लाख रुपये सालाना से कम है, पांच एकड़ से कम जमीन है, 1,000 वर्गफुट से छोटा फ्लैट है, वे इस कोटा के तहत आरक्षण पाने के योग्य हैं.

बीकानेर बीते 15 साल से भाजपा का गढ़ रहा है. भाजपा ने क्षेत्र से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को इस साल फिर से इस सीट से चुनाव मैदान में उतारा है. वह 2009 से इस सीट पर बने हुए हैं और अपने रिश्ते के भाई एवं कांग्रेस उम्मीदवार मदन गोपाल मेघवाल के खिलाफ इस चुनाव में खड़े हुए हैं.

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