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राजनीतिक पार्टी को बताना होगा, कहां से मिला पैसा, क्या है राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया

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राजनीतिक पार्टी को बताना होगा, कहां से मिला पैसा, क्या है राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया

नयी दिल्ली : चुनावी बॉन्ड को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस और माकपा ने प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस ने कहा, भाजपा को बताना चाहिए कि उसे इतने बड़े पैमाने पर चंदा कैसे मिला. पार्टी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं इस आदेश का स्वागत करती हूं. हमने हमेशा कहा है कि चुनावी चंदा लेने और देने में पारदर्शिता होनी चाहिए.” उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने पारदार्शिता को लेकर कुछ नहीं किया है. हम जानना चाहेंगे कि उन्हें इतने बड़े पैमाने पर कैसे चंदा मिला है.”

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे चुनावी बॉन्ड की रसीदों और दानकर्ताओं की पहचान का ब्यौरा सील बंद लिफाफे में चुनाव आयोग को सौंपे. शीर्ष अदालत ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे चुनाव पैनल को 30 मई तक दान राशि एवं दानकर्ता के बैंक खाते का ब्यौरा सौंपे. यह निर्देश प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने दिया.
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने शुक्रवार को कहा कि चुनावी बांड के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले ने राजनीतिक दलों को मिलने वाली दान राशि की पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाने की भाजपा की कोशिश नाकाम कर दी है. येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने गोपनीय चुनावी बॉंड का कानून बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और भाजपा की पहल को ध्वस्त कर दिया है. अदालत ने कहा है कि पारदर्शिता चुनावी चंदे का मूल आधार है. जनता को यह जानने का अधिकार है कि किस दल को कहां से कितना पैसा दान में मिला है.” उन्होंने कहा कि चुनावी बॉंड में दानदाता की पहचान उजागर नहीं करने का प्रावधान लागू करने की भाजपा की कोशिश नाकाम होने की राह पर है. येचुरी ने कहा, ‘‘कालेधन के रास्ते दान देने वाले अब इस राह को अपनाने से डरेंगे .
आज चुनाव आयोग को दान का ब्योरा मिलेगा, कल यह ब्योरा जनता की पहुंच में होगा.” सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राष्ट्रपति को पत्र लिख कर राजनीतिक लाभ के लिये सेना के पराक्रम का इस्तेमाल करने पर नाराजगी जताने के मामले में येचुरी ने कहा, ‘‘लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमारे सैन्य बल अपने निर्धारित दायित्वों का निर्वाह कर रहे हैं.
जब सत्तारूढ़ दल उनके नाम का दुरुपयोग करेगा तो इससे सेना और लोकतंत्र का स्तर गिरेगा.” येचुरी ने कहा कि इस मामले में सत्तारूढ़ दल के नेताओं के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई ही इसका एकमात्र समाधान है. उल्लेखनीय है कि सेना के लगभग 150 पूर्व अधिकारियों ने राष्ट्रपति को एक कथित पत्र लिखकर लोकसभा चुनाव में सेना के पराक्रम का राजनीतिक लाभ के लिये इस्तेमाल किये जाने की शिकायत की है.
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