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Home National राहुल ने राफेल पर फिर मोदी को घेरा, सीतारमण का जेपीसी जांच से इनकार

राहुल ने राफेल पर फिर मोदी को घेरा, सीतारमण का जेपीसी जांच से इनकार

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राहुल ने राफेल पर फिर मोदी को घेरा, सीतारमण का जेपीसी जांच से इनकार

अमेठी/चेन्नई : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान खरीद मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फिर से निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि चौकीदार ने भारतीय वायुसेना से 30 हजार करोड़ रुपये लेकर अपने उद्योगपति मित्र अनिल अंबानी को दे दिये. वहीं, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राफेल सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की विपक्ष की मांग को खारिज दिया.

राहुल ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली योजना मनरेगा को बंद करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया. अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र अमेठी के दो दिवसीय दौरे पर आये राहुल ने एक कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद अंबानी को प्रतिनिधिमण्डल में अपने साथ लेकर गये और उन्हें 30 हजार करोड़ रुपये का ठेका दिलवाने में मदद की. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने 526 करोड़ रुपये का राफेल विमान 1600 करोड़ में खरीदने का सौदा किया. फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि फ्रांस की कंपनी ने अंबानी को ठेका नहीं दिया, बल्कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री ने हमें बता दिया था कि अगर राफेल विमान देना है तो अंबानी को ठेका दो. यह निर्णय किसी और ने नहीं बल्कि खुद प्रधानमंत्री ने लिया. सरकारी कंपनी एचएएल के बजाय अंबानी को ठेका दिलवा दिया.

राहुल ने कहा, मोदी जी कहते हैं कि मुझे प्रधानमंत्री मत बनाओ, चौकीदार बनाओ, मगर चौकीदार ने हिंदुस्तान की एयर फोर्स से 30 हजार करोड़ रुपये लेकर अनिल अंबानी को दे दिये. कांग्रेस अध्यक्ष ने फुरसतगंज में ग्राम प्रधानों के सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा को बंद करना चाहती है. छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को नोटबंदी और जीएसटी के जरिये खत्म कर दिया गया. एक तरफ बेरोजगारी बढ़ रही है और दूसरी तरफ ये मनरेगा को मार रहे हैं. इसका फायदा उनके 15-20 उद्योगपति मित्रों को हो रहा है. राहुल गांधी राफेल सौदे को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमले करते रहे हैं. हालांकि, सरकार और रिलायंस डिफेंस ने राहुल के आरोपों को लगातार खारिज किया है.

राहुल ने जनता से कहा, नरेंद्र मोदी जी को हटाइये और गरीबों, किसानों के हितैषी कांग्रेस की सरकार बनाइये.बुधवार को मैंने प्रियंका को कांग्रेस का महासचिव बना दियाऔर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है. मतलब, अब यहां पर कांग्रेस पार्टी अपना मुख्यमंत्री बैठाने का काम करेगी. राहुल ने कहा, हम जनता के लिए काम करने को तैयार हैं. आपके दिल की बात मैं समझता हूं और आपकी लड़ाई मैं लड़ूंगा. जहां भी आपको मेरी जरूरत होगी, मैं आपके लिए खड़ा हूं. सिर्फ अमेठी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए, जहां भी मेरी जरूरत होगी, मैं आपके लिए हाजिर हूं.

वहीं, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने चेन्नई में राफेल सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की विपक्ष की मांग को खारिज दिया. उन्होंने कहा कि यह 2जी स्पेक्ट्रम या बोफार्स मुद्दे से भिन्न है, जिनमें धन के लेन-देन का पहलू सामने आया था. इस मुद्दे पर पूछे गये एक सवाल पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, इसकी जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि 2जी मुद्दे के विपरीत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक जैसी किसी भी संस्था ने राफेल सौदे के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला है. उन्होंने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय भी पहुंचा. शीर्ष अदालत ने सौदे के लिए निर्णय प्रक्रिया या उसकी कीमत के मुद्दे पर संतोष जताया. बाद में इस मुद्दे पर संसद में भी चर्चा हुई. सरकार ने जब उनका बिंदुवार जवाब दिया तो विपक्षी सदस्यों ने उसे सुनना भी मुनासिब नहीं समझा.

उन्होंने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम या बोफोर्स जैसे मुद्दे मुद्दों पर अतीत में जेपीसी का गठन किया गया था, क्योंकि धन के लेन-देन और स्विट्जरलैंड में संबंधित बैंक खातों के बारे में मीडिया में काफी कुछ प्रकाशित हुआ था. उन्होंने कहा, हालांकि, राफेल में ऐसी स्थिति नहीं है, जिसमें क्वात्रोच्चि जैसा बिचौलिया या धन का लेन-देन नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, आप उस अवधि (1988-89) में बोफोर्स पर मीडिया कवरेज किस हद तक था इस बारे में जानते हैं. क्यों इसे अचानक रोक दिया गया. किसने मुंह बंद करने का प्रयास किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने मीडिया संस्थानों से 1980 के दशक के अंत में बोफोर्स पर कुछ भी प्रकाशित नहीं करने को कहा. कांग्रेस के फरमान का पालन करने के लिए मीडिया के एक हिस्से पर निशाना साधते हुए कहा, किसी ने भी अपना मुंह नहीं खोला और उस तरह के लोग अब राफेल सौदे पर सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार में लगे हैं.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जब उनकी जुबान बंद कर रही थी, तो किसी ने भी बोफोर्स मामले के समय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर शोर नहीं मचाया था. उन्होंने कहा कि हालांकि अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन को लेकर हंगामा मचा रहे हैं.

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