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राम मंदिर मसले पर तीन दिन में ही बदले उमा भारती के सुर

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राम मंदिर मसले पर तीन दिन में ही बदले उमा भारती के सुर

नयी दिल्ली : राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रही भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने बुधवार को राम भक्तों से कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस सुझाव का समर्थन करें कि मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग पर विचार न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जा सकता है. हालांकि, उमा भारती का यह बयान उनके द्वारा तीन दिन पहले दिये गये बयान से उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के रहते अयोध्या में राममंदिर के निर्माण का रास्ता न निकले, तो देश के लोगों को धक्का लगेगा.

केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब विश्व हिंदू परिषद ने जोर दिया है कि मंदिर निर्माण का मार्ग सिर्फ कानून लाकर ही प्रशस्त किया जा सकता है और हिंदू अनंतकाल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकते. भारती ने ट्वीट कर रहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक व्यापक साक्षात्कार दिया है जिसमें राम मंदिर का मुद्दा भी है. सभी राम भक्तों को इससे सहमत होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मोदी की टिप्पणी मंदिर निर्माण के मार्ग में रोड़ा नहीं अटकाती है, क्योंकि विभिन्न समूहों से बातचीत के जरिये मंदिर निर्माण का विकल्प खुला है. भारती ने राहुल गांधी, मायावती, ममता बनर्जी जैसे विपक्षी नेताओं से अपील की है कि वे मंदिर निर्माण के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मदद करें.

उन्होंने ट्वीट किया, मंदिर का निर्माण कठिन होने के साथ-साथ सरल है. अगर सभी राजनीतिक पार्टियां इस पर उसी तरह से सहमत हो जाये जैसे सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए हुई थी, तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता है. अगर मामले को अनसुलझा छोड़ दिया जाये तो सिर्फ राम ही जानते हैं कि इसका (मामले का) समापन कैसे होगा.

हालांकि, चार दिनपहले ही उमा भारती ने कहा था कि यदि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के रहते अयोध्या में राममंदिर के निर्माण का रास्ता न निकले, तो देश के लोगों को धक्का लगेगा. उमा भारती ने कहा था कि यह सही है कि मोदीजी प्रधानमंत्री हों और योगीजी मुख्यमंत्री हों और फिर भी राममंदिर निर्माण का रास्ता न निकले तो लोग इस बात से आश्चर्यचकित होंगे कि हम राममंदिर के लिए रास्ता क्यों नहीं बना पाये. उन्होंने आगे कहा, इट विल बी शॉक टू द पीपुल (यह लोगों के लिए धक्का होगा).

भाजपा की तेज तर्रार नेता ने कहा, यह सच्चाई है कि भाजपा की वर्ष 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में दो सीटें थीं. जब राममंदिर आंदोलन हुआ, तो वर्ष 1989 में दो सीटों से 84 सीटें हुई थीं और अंत में 2014 के लोकसभा चुनाव में 284 सीटें आ गयी थीं. उन्होंने कहा, राममंदिर की बहुत बड़ी भूमिका रही है. इसलिए मोदी और योगी के रहते हुए जिस तरह लोगों की आशा है, राममंदिर के निर्माण का रास्ता निकलना चाहिए.

उमा ने कहा, मैं आज भी यही कहूंगी चाहे एक्ट हो, चाहे अध्यादेश हो, सामंजस्य का रास्ता बनाकर ही राममंदिर निर्माण का रास्ता निकालना चाहिए और इसमें सबको सहयोग करना चाहिए. इस बात के साथ होना चाहिए कि आप (राममंदिर निर्माण की) बात शुरू करो हम आपका साथ दे देंगे. यह पहल अटलजी के समय भी हुई थी और चंद्रशेखरजी के समय पर भी हुई थी. जब उनसे सवाल किया गया कि क्या मोदी का जादू अब भी चलेगा, तो उन्होंने कहा, मोदी का जादू तो चलेगा. अभी हमने त्रिपुरा में विभिन्न नगर निकाय चुनाव जीते हैं. वह अपने आप में बहुत बड़ी कठिन बात थी. वहां हमारी सरकार बनना कठिन बात थी. इसलिए मोदी का जादू अभी चल रहा है.

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