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YEAR 2018 बयानबाजी के लिए रहेगा याद, स्तरहीन हुई राजनीति में बयानबाजी

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YEAR 2018  बयानबाजी के लिए रहेगा याद, स्तरहीन हुई राजनीति में बयानबाजी

नयी दिल्ली : साल 2018 राजनीतिक बयानबाजी के नजरिये से बेहद रोचक और कभी- कभी निराशाजनक रहा. कई बार बयानों की वजह से मुस्कान खिली, तो कई बार राजनीतिक बयानबाजी के गिरते स्तर ने निराश कर दिया. "चौकीदार चोर है " "मसखरा राजकुमार", नामदार औऱ कामदार यह कुछ ऐसे शब्द हैं जिन्होंने राजनीतिक बयानबाजी में नेताओं को नये शब्द दिये .

"साल 2019 में कौन प्रधानमंत्री होगा कहना मुश्किल है". बाबा रामदेव ने साल के अंत में यह बयान देकर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है. बाबा रामदेव ने कहा मैं आपको सारी चीजें नहीं बता सकता. बाबा के इस बयान से जाहिर है नये साल में इस बयान का राजनीतिक असर होगा. बाबा यहां राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहे हैं, लेकिन साल 2018 में कई ऐसे बयान सामने आये जिससे विवाद बढ़ा. आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही बयान जिनसे विवाद बढ़ा :-

रामभक्त हनुमान की जाति
राजनीति में भगवान राम की चर्चा नयी नहीं है. भगवान राम के राजनीतिक इस्तेमाल के बाद उनके भक्त हनुमान को भी अब राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बना लिया गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान में चुनावी प्रचार के दौरान हनुमान जी को वनवासी बताते हुए उन्हें दलित बताया. योगी के इस बयान के बाद राजनीति के दूसरे दिग्गजों ने भी हनुमान जी की जाति को लेकर रिसर्च शुरू कर दिया और जमकर बयानबाजी की. किसी ने उन्हें जाट तो किसी ने मुस्लिम तक बता दिया. बयानबाजी सिर्फ जाति तक सीमित नहीं रही उन्हें देश के बाहर का भी बता दिया गया.
बड़े नेताओं की तुलना कीड़े मकोड़ों से
स्वास्थ्य राज्य मंत्री और बिहार के नेता अश्विनी कुमार चौबे ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना नाली के कीड़े से कर दी. प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए मोदी को आकाश तो राहुल गांधी को नाली का कीड़ा बता दिया. पीएम मोदी गगन के जैसे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष का आकार नाली के कीड़े की तरह. सिर्फ अश्विनी चौबे ही नहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अपनी किताब "द पैराडॉक्सिकल प्राइम मिनिस्टर" में थरूर ने मोदी को शिवलिंग पर बैठे बिच्छू की तरह बता दिया. थरूर ने कहा, शिवलिंग पर बैठे बिच्छू को आप ना तो हाथों से और ना ही चप्पल से मार सकते हैं. उन्होंने इस टिप्पणी के साथ आरएसएस के एक अज्ञात व्यक्ति की टिप्पणी का जिक्र करते हुए उक्त बातें लिखी थी.
किसान आंदोलन पर नेताओं की टिप्पणी
देश में किसानों ने जंतर मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया था. दक्षिण से आये किसानों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन इस स्तर तक पहुंचा की सड़क पर खाना, चूहे को मूंह में रखकर प्रदर्शन किया था. मौजूदा सरकार के कई नेताओं ने इसे प्रायोजित कहकर किनारा कर लिया था. केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मीडिया के सामने आने के लिए कुछ अनोखा करना पड़ता है. मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री रह चुके बालकृष्ण पाटीदार ने किसानों की आत्महत्या को लेकर अजीब बयान दिया था, उन्होंने कहा, सुसाइड कौन नहीं करता? व्यापारी करता है, पुलिस कमिश्नर भी करता है. यह पूरे वर्ल्ड की प्रॉब्लम है. सुसाइड का कारण जो सुसाइड कर रहा है, सिर्फ उसे पता है. हम लोग सिर्फ अंदाजा लगाते हैं.’
राजनीतिक बयानबाजी में पार कर दी नेताओं ने सीमा
कई ऐसे बयान है जिसमें नेता अक्सर सीमा लांघ जाते हैं. चुनावी मंच से किसी भी नेता पर की गयी निजी टिप्पणी इस हद तक पहुंच जाती है कि चर्चा का विषय बन जाती है. भारतीय राजनीति के गिरते स्तर को लेकर चर्चा हुई लेकिन इन बयानों पर गौर कीजिए आप पायेंगे कि इसके गिरते स्तर के सुधरने की संभावना कितनी है. बिहार के दिग्गज नेता शरद यादव ने वसुंधरा राजे को "मोटी " कह दिया.अलवर मे चुनाव प्रचार के दौरान शरद यादव ने कहा, वह मोटी हो गयीं हैं, उन्हें आराम देने की जरूरत है. हरियाणा के स्वास्थ मंत्री और भाजपा नेता अनिल विज ने राहुल गांधी की तुलना निपाह वायरस से की. उन्होंने कहा, राहुल गांधी जिस पार्टी के संपर्क में आयेंगे वह खत्म हो जायेगी. कांग्रेस नेता राज बब्बर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए , डॉलर की तुलना में रुपये की गिरावट का जिक्र करते हुए पीएम मोदी की मां की उम्र से कर दी थी. बयानबाजी यही तक नहीं रुकी कांग्रेस के नेता विलासराव ने पीएम मोदी के पिता का जिक्र करते हुए कहा, कोई नहीं जानता कि उनके पिता कौन थे जबकि राहुल गांधी की पूरी पीढ़ी को दुनिया जानती है. राजनीति में इस तरह के बयान नये नहीं है, रेप, किसान आत्महत्या, सेना के जवानों की शहादत, पर भी नेता टिप्पणी कर चुके हैं. ऐसे कई बयान चुनावी प्रचार के दौरान सामने आते रहे हैं जिससे राजनीति के गिरते स्तर का पता चलता है.
बयानवीर के नाम से बनायी पहचान
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव के बयान सुर्खियों मे रहे. उनकी चर्चा तब शुरू हुई जब उन्होंने मिस वर्ल्ड डायना हेडन का जिक्र करते हुए कहा, वह भारतीय सुंदरी नहीं हैं. उनकी जीत पहले से तय कर दी गयी थी. कॉस्मेटिक कंपनियों ने भारत में बाजार बनाने के लिए डायना को यह ताज पहना दिया. इस बयान पर खूब हंगामा हुआ था डायना हेडन ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी. बिप्लब ने नये दौर के इंटरनेट का तार महाभारत से जोड़ते हुए कहा था अगर एक आदमी बिना देखे युद्ध का वर्णन सुना रहा है तो कोई तकनीक तो थी, महाभारत को देखकर ही इंटरनेट बनाने का आइडिया आया होगा. अपने यहां पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कह दिया त्रिपुरा गिद्ध देखने आयें.

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