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Home National कांग्रेस का भाजपा पर निशाना, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग करना ‘गुजरात मॉडल”

कांग्रेस का भाजपा पर निशाना, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग करना ‘गुजरात मॉडल”

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कांग्रेस का भाजपा पर निशाना, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग करना ‘गुजरात मॉडल”

नयी दिल्ली/जयपुर : जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा विधानसभा भंग किये जाने के फैसले को असंवैधानिक एवं अनैतिक करार देते हुए कांग्रेस ने गुरुवार को भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि यह ताजा घटनाक्रम ‘गुजरात मॉडल’ के तहत हुआ है.

पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, जब तक सरकार बनाने के लिए कोई दावा नहीं किया गया था तब तक राज्यपाल विधानसभा को निलंबित रखकर खुश थे. जैसे ही किसी ने दावा किया, उन्होंने विधानसभा भंग कर दी. संसदीय लोकतंत्र शर्मिंदा है. उन्होंने भाजपा पर तंज किया, लोकतंत्र का वेस्टमिंस्टर मॉडल पुराना पड़ चुका है. अन्य सभी मामलों की तरह यहां भी गुजरात मॉडल ही जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को पसंद आया. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी ने जयपुर में संवाददाताओं से कहा, जम्मू-कश्मीर में जिस तरह के असंवैधानिक, अनैतिक और अनुचित कार्य को वहां के राज्यपाल ने अंजाम दिया है, हम उसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल मलिक ने भारत के संविधान के साथ खिलवाड़ किया है और यह सीधा-सीधा प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय के इशारों पर हुआ है.

तिवारी ने मलिक के फैसले को असंवैधानिक और अनैतिक करार देते हुए कहा, हम जम्मू कश्मीर के राज्यपाल से पूछना चाहते हैं कि छह महीने पहले जब पीडीपी के साथ गठबंधन की सरकार से भाजपा अलग हो गयी थी, उस समय विधानसभा क्यों नहीं भंग की गयी? उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने पिछले पांच-छह महीनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों को तोड़ने और लुभाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसका यह षडयंत्र पूरी तरह विफल रहा. यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा को कोई राजनीतिक दल, कोई विधायक समर्थन देने को तैयार नहीं है. गौरतलब है कि बुधवार की शाम महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी के 29, नेकां के 15 और कांग्रेस के 12 विधायकों को मिलाकर 56 विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा करते हुए सरकार बनाने की पेशकश की थी. इसके बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग करने का फैसला किया.

उधर, विधानसभा भंग करने के फैसले के एक दिन बाद राज्यपाल मलिक ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने राज्य के संविधान के अनुरूप और उसके हित में यह फैसला लिया. मलिक ने कहा विधायकों की खूब खरीद-फरोख्त हो रही थी. साथ ही उन्होंने कहा कि वह दल-बदल के जरिये सरकार बनाने की अनुमति नहीं दे सकते थे. राज्य में सरकार बनाने की कवायद के पीछे सीमा पार का आदेश होने संबंधी भाजपा के आरोप पर भी तिवारी ने पलटवार किया और कहा कि सत्तारुढ़ पार्टी बताये कि क्या उसके किसी एक नेता ने भी आतंकवाद से लड़ते हुए शहादत दी है. तिवारी ने ट्वीट कर भाजपा पर निशाना साधा और कहा, कांग्रेस-पीडीपी-नेशनल कांफ्रेंस आतंकवाद के साथ हैं और भाजपा आतंकवादियों के विरोध में है? क्या बकवास है. भाजपा को चुनौती देता हूं कि वह अपने किसी एक नेता का नाम बताये जिसने आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए बलिदान दिया हो.

उन्होंने कहा,‘‘ कांग्रेस अपने 500 नेताओं के नाम बता सकती है जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए बलिदान दिया है. मुझे भरोसा है कि नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी भी ऐसा कर सकती हैं. गौरतलब है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव ने कथित तौर पर कहा कि पीडीपी-नेकां ने पिछले महीने निकाय चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया था, वो आदेश भी उन्हें सीमा पार से आया था. ऐसा लगता है कि राज्य में सरकार बनाने को लेकर उन्हें नये आदेश मिले होंगे. इसी कारण राज्यपाल को यह फैसला लेना पड़ा. इस पर नेकां नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि माधव अपना दावा साबित करें या फिर माफी मांगें.

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