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नीतीश कटारा हत्याकांड : विकास यादव को फर्लो देने से हाइकोर्ट का इनकार

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नीतीश कटारा हत्याकांड : विकास यादव को फर्लो देने से हाइकोर्ट का इनकार

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह नीतीश कटारा हत्याकांड में सजा काट रहे विकास यादव को फर्लो देने से इनकार किये जाने के अपने एकल न्यायाधीश के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगा. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि पहले राज्य सरकार और बाद में एकल न्यायाधीश ने नौ जुलाई को यादव की याचिका को उसके आचरण के आधार पर खारिज किया था.

पीठ ने कहा, ‘हम मामले में हस्तक्षेप नहीं करने जा रहे.’ इसने उल्लेख किया कि यादव को जेल में उसके कदाचार के आधार पर दंडित किया गया और वहां उसका व्यवहार संतोषजनक नहीं पाया गया. अदालत ने यादव से कहा, ‘तुम्हारा व्यवहार अच्छा नहीं रहा. फर्लो के लिए तुम्हारा आग्रह तुम्हारे आचरण के आधार पर खारिज किया गया.’ इसने कहा कि वह नौ जुलाई के आदेश के खिलाफ यादव की अपील पर बाद में फैसला करेगी. मामला 16-17 फरवरी 2000 की मध्यरात्रि का है जब विकास की यादव की बहन एवं उत्तर प्रदेश के राजनीतिक नेता डीपी यादव की पुत्री भारती के साथ कथित प्रेम संबंधों के चलते एक विवाह समारोह से कटारा का अपहरण कर लिया गया था और फिर उसकी हत्या कर दी गयी.

निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि कटारा की हत्या इसलिए की गयी क्योंकि भारती के साथ कटारा के संबंधों से विशाल और विकास खुश नहीं थे क्योंकि वे अलग-अलग जातियों से थे. विकास यादव के वकील ने शुक्रवार को अदालत में कहा कि उनका मुवक्किल जेल में पहले ही 16 साल गुजार चुका है और जेल नियमों को तोड़ने के मामले में उसे चार बार दंडित किया गया है. फौजदारी मामलों के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता राजेश महाजन ने इसका विरोध किया और कहा कि यादव फर्लो के लिए योग्य नहीं है क्योंकि उसने वार्षिक तौर पर अच्छे आचरण के आवश्यक तीन मापदंड हासिल नहीं किये हैं. महाजन ने कहा कि यादव तब तक किसी छूट का पात्र नहीं होगा जब तक कि वह अपनी 25 साल कैद की सजा पूरी नहीं कर लेता. इस सजा को बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा था.

महाजन ने कहा कि उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि दोषी अपनी सजा पूरी करने तक छूट का पात्र नहीं है. अभियोजन पक्ष के वकील ने यह भी कहा कि यादव की अपील विचार योग्य नहीं है क्योंकि शीर्ष अदालत के अनुसार किसी फौजदारी रिट याचिका में एकल न्यायाधीश के आदेश पर केवल उच्चतम न्यायालय में ही चुनौती दी जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि यादव पैरोल के लिए आवेदन कर सकता है क्योंकि इसके लिए वार्षिक तौर पर अच्छे आचरण संबंधी छूट की आवश्यकता नहीं होती. फर्लो एक साल में निश्चित अवधि के लिए जेल से छुट्टी मिलने का किसी कैदी का अधिकार होता है. इसकी गिनती जेल की कुल अवधि में शामिल की जाती है. जेल अधिकारी खास मामलों में यह राहत देने से इनकार कर सकते हैं. पैरोल के तहत भी जेल से अस्थायी रिहाई होती है, लेकिन यह कैदी का अधिकार नहीं होता. इसकी अवधि जेल की कुल अवधि में शामिल नहीं होती.

उच्चतम न्यायालय ने गत वर्ष 29 अगस्त को विशाल और विकास यादव की वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने 25 साल कैद की सजा के फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया था. इसने मामले में तीसरे दोषी सुखदेव पहलवान को भी 20 साल कैद की सजा सुनायी थी.

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