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Home National …जब वाजपेयी ने मनमोहन को इस्तीफा नहीं देने के लिए किया था राजी

…जब वाजपेयी ने मनमोहन को इस्तीफा नहीं देने के लिए किया था राजी

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…जब वाजपेयी ने मनमोहन को इस्तीफा नहीं देने के लिए किया था राजी

नयी दिल्ली : अटल बिहारी वाजपेयी आधुनिक भारत के महान नेताओं में शुमार किये जाते हैं. और, उन्हें यह उपमा उन्हें व उनकी विचारधारा का अनुकरण करने वाले नेता व लोग ही नहीं देते बल्कि उनके वैचारिक विरोधीडॉ मनमोहन सिंह भी देते हैं. अटल जी के निधन को दो दिन गुजर गये हैं, लेकिन देश अभी उनके जाने के गम से नहीं उबरा है. अटल जी अपनी कार्यशैली से हर किसी पर गहरी छाप छोड़ देते. वे अपने व्यवहार से नाराज लोगों को, विराेधियों को सबको कायल बना लेते. ऐसा ही उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह के साथ भी किया था.

90 के दशक में पीवी नरसिंह राव की सरकार में डॉ मनमोहन सिंह वित्तमंत्री थे. अर्थशास्त्री मनमोहन एकेडमिक व ब्यूरोक्रेसी बैकग्राउंड के थे और राजनीति में वैसे तपे-तपाये नहीं थे, जैसे तब के प्रधानमंत्री नरसिंह राव व विपक्ष के सबसे बड़े नेता वाजपेयी थे. ऐसे में एक बार संसद में वाजपेयी ने वित्तमंत्री के रूप में मनमोहन पर तीखा प्रहार किया, उनके कामकाज की कटु आलोचना की. इससे मनमोहन बेहद मर्माहत हो गये. उन्होंने इस्तीफा देने का मन बना लिया और इसके बारे में प्रधानमंत्रीराव से चर्चा तक कर ली.

पीवी नरसिंह राव के लिए यह विकट स्थिति थे. राव मनमोहन की योग्यता व आर्थिक समझ से वाकिफ थे. इसी कारण उन्होंने तब के जटिल व चुनौतीपूर्ण आर्थिक दौर से देश को बाहर निकालने के लिए मनमोहन को वित्तमंत्री बनाया था और ऐसे में उनका कैबिनेट छोड़ जाना कतई उचित नहीं होता. राव ने ऐसे में अपने मित्र वाजपेयी से मुलाकात की और उनसे बात की. राव ने उन्हें बताया कि मनमोहन सिंह उनकी आलोचना से दु:खी हैं और वित्त मंत्रालय छोड़ना चाहते हैं.

वाजपेयी को राजनीतिक आलोचना पर मनमोहन के इस फैसले पर अचरज हुआ और उन्होंने राव को आश्वस्त किया कि वे मनमोहन को इस्तीफा नहीं देने के लिए राजी कर लेंगे. इसके बाद अटल जी ने मनमोहन सिंह से भेंट की और उन्हें समझाया कि राजनीतिक आलाेचनाओं को निजी तौर पर नहीं लेना चाहिए. विपक्ष की यह जिम्मेवारी है कि वह मुद्दों पर सरकार की आलोचना व सचेत करे.

वाजपेयी के समझाने पर मनमोहन समझ व मान गये. उन्होंने इस्तीफा नहीं देने का निर्णय लिया और वित्तमंत्री के रूप में देश की सेवा जारी रखी. मनमोहन सिंह देश के सबसे सफल वित्तमंत्रियों में गिने गये. वाजपेयी की इस समझाइश से डॉ मनमोहन सिंह का राजनीति के प्रति नजरिया भी बदला और भविष्य में वे भी अपने विरोधियों को विनम्र पर आक्रामक तरीके से जवाब देने लगे और संसद में उन्होंने कई शायरियों में प्रधानमंत्री रहते विपक्ष को जवाब दिया.

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