[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home National …अब मिलेगी गंजेपन से आजादी, IIT के वैज्ञानिकों ने इलाज के लिए विकसित किया हाइड्रोजेल

…अब मिलेगी गंजेपन से आजादी, IIT के वैज्ञानिकों ने इलाज के लिए विकसित किया हाइड्रोजेल

0
…अब मिलेगी गंजेपन से आजादी, IIT के वैज्ञानिकों ने इलाज के लिए विकसित किया हाइड्रोजेल

नयी दिल्ली : आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने बालों की वृद्धि के लिए रेशम आधारित एक हाइइ्रोजेल विकसित किया है. इसका जंतुओं पर परीक्षण किये बिना ही गंजेपन का उपचार करने के लिए दवा बनाने में मदद मिल सकती है. सेलुलर फिजिओलॉजी में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट से पता चलता है कि किस तरह से सूक्ष्म त्रिआयामी (3 डी) तकनीक इस प्रक्रिया में मददगार हो सकती है.

जीन, बीमारी, ट्रॉमा और सर्जरी जैसे विभिन्न कारणों से मनुष्य अस्थाई या स्थाई तौर पर गंजा हो सकता है. गंजेपन को रोकने के लिए कई तरह के तेल, क्रीम और दवाएं व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन इसका सफल उपचार अभी तक एक सपना ही है.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर सौरभ घोष ने कहा, ‘इस तरह की समस्या का बड़ा कारण यह है कि दवा परीक्षण के लिए कोई उपयुक्त मानव कोशिका आधारित कृत्रिम परिवेशीय मॉडल उपलब्ध नहीं है. गंजेपन को रोकने के लिए वर्तमान में उपलब्ध दवाओं का इस्तेमाल जंतुओं पर किया जाता है.’

घोष ने कहा, ‘लेकिन, मानव और जंतुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक संरचना में भिन्नताओं की वजह से इस तरह की दवाओं की सफलता काफी सीमित हो जाती है.’ उन्होंने कहा, ‘हमें मानव कोशिकाओं का इस्तेमाल कर बालों की सतह का कृत्रिम परिवेशीय मॉडल विकसित करने की अत्यंत आवश्यकता महसूस हुई.’

यदि यह सफल रहा तो इस तरह की दवाएं गंजेपन का सामना कर रहे लोगों की समस्या का समाधान कर देंगी. अध्ययन करने वाली टीम में बेंगलुरु स्थित आईटीसी लाइफ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी सेंटर के शोधार्थी भी शामिल थे जिन्होंने रेशम के कीड़े से अलग किये गये रेशम प्रोटीन और जिलेटिन के मिश्रण से हाइड्रोजेल विकसित किया. स्थाई हाइड्रोजेल प्रणाली विकसित करने के लिए टाइरोसिनासे एंजाइम का इस्तेमाल किया गया.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel