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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक कदम, पत्रकारों को दी गयी कोर्ट रूम में मोबाइल ले जाने की इजाजत

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक कदम, पत्रकारों को दी गयी कोर्ट रूम में मोबाइल ले जाने की इजाजत

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मान्यता प्राप्त एवं गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों को अदालत कक्षों (कोर्ट रूम) में मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत दे दी. हालांकि, अदालत ने पत्रकारों से कहा कि वे अदालत कक्ष में मोबाइल ‘साइलेंट मोड’ में रखें. यह इजाजत इस चेतावनी के साथ दी गयी है कि फोन का इस्तेमाल करने वालों के कारण यदि अदालत कक्ष में कोई परेशानी हुई, तो फोन जब्त कर लिया जायेगा.

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फोन के इस्तेमाल पर पहले जारी किये गये एक सर्कुलर में कहा गया कि भारत के प्रधान न्यायाधीश को मीडिया कर्मियों/पत्रकारों, जिन्हें रजिस्ट्री की ओर से छह महीने का पास जारी किया गया है, को अदालत कक्षों के भीतर साइलेंट मोड पर फोन ले जाने की इजाजत देते हुए खुशी हो रही है और डिप्टी-रजिस्ट्रार (जनसंपर्क) पासों पर उचित रूप से यह अंकित करेंगे कि उस व्यक्ति को अदालत कक्ष में मोबाइल फोन लेकर जाने की इजाजत दी जाये.

बहरहाल, सर्कुलर में यह भी कहा गया कि यदि अदालत कक्ष में मोबाइल की वजह से कोई परेशानी हुई तो कोर्ट मास्टर फोन को जब्त कर अतिरिक्त रजिस्ट्रार (सुरक्षा) को सौंप देंगे. मई में एक सर्कुलर जारी कर कहा गया था कि सिर्फ मान्यता प्राप्त पत्रकारों को अदालत कक्षों में मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत होगी. बाद में कुछ पत्रकारों ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के सामने इस मुद्दे को उठाया, जिसके बाद एक अन्य अधिसूचना जारी की गयी और उन मीडियाकर्मियों को अदालत कक्षों में मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत दी गयी, जिन्हें छह महीने के लिए पास जारी किये गसे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि शीर्ष अदालत ने पत्रकारों को अदालत कक्षों में मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत दी है. उन्होंने कहा कि अदालतों में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई विशिष्ट आदेश नहीं था, लेकिन यह एक प्रशासनिक फैसला था. अधिकारी ने कहा कि वकीलों को अदालत कक्षों में मोबाइल फोन साइलेंट मोड पर रखकर ले जाने की अनुमति होती है. न्यायालय की कार्यवाहियां कवर करने वाले पत्रकारों ने इस कदम की तारीफ की है. उन्होंने कहा है कि इससे किसी घटना की खबरें तुरंत देने में मदद मिलेगी.

एक वरिष्ठ विधि संवाददाता ने बताया कि यह वाकई अच्छी खबर है. पहले हमें अपने मोबाइल फोन अदालत कक्षों के बाहर रखने होते थे. हमें हर सुनवाई के बाद दौड़कर बाहर आना होता था, ताकि हम अपने दफ्तर को सूचित कर सकें या किसी खबर को ट्वीट कर सकें, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जिस अधिसूचना से मोबाइल ले जाने की अनुमति दी गयी है, उसने हमारी जिंदगी आसान बना दी है. यह पहले ही कर देना चाहिए था. देर आये, दुरुस्त आये.

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