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Home National उन्नाव दुष्कर्म मामले में बोले भाजपा नेता, जनता के बीच खड़ा करके गोली मार देनी चाहिए

उन्नाव दुष्कर्म मामले में बोले भाजपा नेता, जनता के बीच खड़ा करके गोली मार देनी चाहिए

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उन्नाव दुष्कर्म मामले में बोले भाजपा नेता, जनता के बीच खड़ा करके गोली मार देनी चाहिए
नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश के उन्नाव में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में राजनीति तेज है. विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि भाजपा के कई नेताओं ने चुप्पी साध ली है. इस बीच, भाजपा के कई ऐसे नेता हैं जो खुलकर मामले में अपने विचार रख रहे हैं. असम से सांसद आरपी शर्मा ने कहा, दोषी को जनता के सामने सड़ा करके गोली मार देनी चाहिए या फांसी पर चढ़ा देना चाहिए.
दोषी के खिलाफ किसी भी तरह की दया नहीं दिखायी जानी चाहिए. अगर, दोषी भाजपा का सदस्य है तब भी उस पर दया नहीं होनी चाहिए . उसकी सजा भी जनता के बीच सुनायी जानी चाहिए. आईपीसी की 363, 366, 376 और 506 धारा के तहत इस मामले को दर्ज किया गया है. मामले को पॉक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन फ़्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट (2012) के तहत ये केस किया गया है.
पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा कि सीबीआई अब इस मामले में साक्ष्य जुटाने का काम करेगी. इस दौरान पीड़िता के परिवार को सुरक्षा मुहैया करायी गयी है. लेकिन, जब प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पत्रकारों ने उनसे पूछा कि पॉक्सो एक्ट में पीड़िता के बयान के बाद अभियुक्त को गिरफ़्तार करने का प्रावधान है, तो क्या इस मामले को अलग तरह से ट्रीट किया जा रहा है? वो कैसे आज़ाद घूम सकते हैं?
इसके जवाब में ओपी सिंह ने कहा, "17 अगस्त, 2017 को जब पहली बार इस मामले की शिक़ायत की गयी थी, तो उसमें विधायक जी का नाम नहीं था. अभी भी वो आरोपी हैं. तो आप लोग बतायें कि उन्हें किस आधार पर रोका जा सकता है? "इससे पहले लखनऊ ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक राजीव कृष्ण ने इस मामले में एसआईटी की रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी.
क्या हैं आरोप?
कुलदीप सेंगर पर एक नाब़ालिग लड़की के साथ कथित तौर पर जून 2017 में बलात्कार करने का आरोप है. इस मामले में पिछले साल पीड़ित लड़की की एफ़आईआर पुलिस ने नहीं लिखी थी जिसके बाद लड़की के परिवारवालों ने कोर्ट का सहारा लिया. पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसके बाद से विधायक के परिजन उन पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं.
वहीं, लड़की का कहना है कि न्याय के लिए वह उन्नाव पुलिस के हर अधिकारी के पास गयी, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. उसका आरोप है कि विधायक और उनके साथी पुलिस में शिक़ायत नहीं करने का दबाव बनाते रहे हैं और इसी क्रम में विधायक के भाई ने तीन अप्रैल को उनके पिता से मारपीट भी की. इसके बाद हिरासत में उसके पिता की मौत हो गयी.
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