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Home National क्या प्रवीण तोगड़िया भाजपा को गुजरात में 99 के फेर में डालने की कीमत चुका रहे हैं?

क्या प्रवीण तोगड़िया भाजपा को गुजरात में 99 के फेर में डालने की कीमत चुका रहे हैं?

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क्या प्रवीण तोगड़िया भाजपा को गुजरात में 99 के फेर में डालने की कीमत चुका रहे हैं?

अहमादाबाद : हर बात पर दहाड़ने वाले विश्व हिंदू परिषद के ताकतवर कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया मंगलवार को मीडिया से रोते हुए रू-ब-रू हुए थे और उन्होंने स्वयं का इनकाउंट किये जाने की आशंका जतायी. उनके इस दावे के बाद प्रवीण तोगड़िया और संघ परिवार से उनके रिश्तों की पड़ताल मीडिया में शुरू हो गयी. प्रवीण तोगड़िया खुद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के परिवार से आते हैं और उसके एक ताकतवर संगठन विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. मुंबई मिरर ने खबर दी है कि प्रवीण तोगड़िया ने अपने तीखे तेवर के कारण गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को 99 सीटों तक सीमित कर दिया था, जिससे उनसे न सिर्फ भाजपा बल्कि पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तक बुरी तरह खफा है.

यह भी दिलचस्प बात है कि कल प्रेस कान्फ्रेंस के बाद प्रवीण तोगड़िया से मिलने सबसे पहले भाजपा विरोधी पाटीदार नेता हार्दिक पटेल व कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया भी पहुंचे. दोनों ने मुलाकात के बाद मीडिया में भाजपा, नरेंद्र मोदी व अमित शाह के खिलाफजबकि तोगड़िया के समर्थन में बयान दिया.

गुजरात चुनाव की मुश्किलें

दरअसल, भाजपा इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस के नेतृत्व में कड़ी चुनौती का सामना कर रही थी. राहुल गांधी की चुनावी रणनीति को उनके पक्ष में जातीय नेताओं हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर व जिग्नेश मेवाणी की गोलबंदी के कारण बल मिला था. इनसभी के सार्वजनिक कार्यक्रमों के सुर भाजपा के विरोध में थे. इस पर प्रवीण तोगड़िया भी गुजरात में महीनों से सक्रिय थे. वे वैसे मुद्दे उठाते रहे, जिससे भाजपा को चुनावी नुकसान हो सकता था. भाजपा जहां इस बार मुसलिमों को गुजरात में लुभाने के लिए प्रयास कर रही थी, वहीं तोगड़िया के तेवर उनके प्रति हमेशा की तरह तल्ख थे. उन पर पाटीदार आंदोलन को उकसाने के प्रयास का आरोप है.

क्या मोदी-शाह के विजय रथ को रोकना चाहते थे तोगड़िया?

सूत्रों का कहना है कि तोगड़िया को इसके लिए संघ परिवार की ओर से चेतावनी दी गयी और कहा गया कि वे ऐसा नहीं करें. लेकिन, तोगड़िया कहां मानने वाले थे. राजनीति प्रेक्षकों का मानना है कि शायद तोगड़िया ऐसा कर भाजपा के विजय रथ को रोक देना चाहते थे, ताकि नरेंद्र मोदी-अमित शाह को नीचा देखना पड़े. दरअसल, नरेंद्र मोदी के गुजरात का सीएम बनने के बाद प्रवीण तोगड़िया से उनके रिश्ते बिगड़ गये और तोगड़िया ने हमेशा एंटी मोदी लाइन ही रखी. वहीं, मोदी नेप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर कभी उन परकुछनहीं कहा और स्वयं को अपनेएजेंडेपर फोकसरखा.

तोगड़िया को पद से हटाने का प्रयास

संघ परिवार का एक बड़ा तबका यह चाहता हैं कि प्रवीण तोगड़िया विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष पद से हट जायें. लेकिन, तोगड़िया ने उनकी यह कोशिशें विफल करने में अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी है. 29 दिसंबर को भुवनेश्वर में विहिप की कार्यकारी बोर्ड की बैठक में उन्हें पद से हटाने का प्रयास हुआ था, लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ा. यह भी माना जा रहा है कि कल का उनका प्रेस कान्फ्रेंस, आंसू और इनकाउंटर का भय स्वयं को पद पर बनाये रखने की उनकी एक रणनीति का ही हिस्सा है, ताकि कार्यकर्ताओं की सहानुभूति उनके प्रति रहे.

मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, तोगड़िया के अलावा विहिप के अध्यक्ष राघव रेड्डी का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है, जिनकी जगह वी कोकजे को अध्यक्ष का प्रयास किया जा रहा था, जिन्हें पीएम मोदी का भी समर्थन हासिल था, लेकिन तोगड़िया ने इसका कड़ा विरोध किया. उनके ऐसे ही रुख ने संघ परिवार को उनके नाराज कर दिया है. शायद इसलिए संघ के बड़े नेता एमजी वैद्य ने कहा है कि तोगड़िया ने इनकाउंटर की साजिश में शामिल नामों के खुलासे की बात कही है, हमें उसका इंतजार करना चाहिए.

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