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Home National राज्यसभा उम्मीदवारी की रेस में संजय सिंह आशुतोष और कुमार विश्वास पर क्यों पड़े भारी?

राज्यसभा उम्मीदवारी की रेस में संजय सिंह आशुतोष और कुमार विश्वास पर क्यों पड़े भारी?

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राज्यसभा उम्मीदवारी की रेस में संजय सिंह आशुतोष और कुमार विश्वास पर क्यों पड़े भारी?

नयी दिल्ली : अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के लिए आज अपने उम्मीदवार के नाम पर फैसला ले लिया. दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने मीडिया को बताया कि पार्टी नेता संजय सिंह, चार्टर्ड एकाउंटेंट नारायण दास गुप्ता और कारोबारी सुशील गुप्ता को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है. उन्होंने कहा कि हमने देश के 18 मशहूर हस्तियों के नामों पर विचार किया और अंतत: इन नामों पर फैसला लिया. पार्टी ने राज्यसभा केलिए एक ही पार्टी नेता संजय सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि दो उम्मीदवार पार्टी से बाहर के हैं.

संजय सिंह ने राज्यसभा उम्मीदवारी की रेस में कवि से नेता बने कुमार विश्वास और पत्रकार से राजनीति में आशुतोष को पीछे छोड़ा है. इन दोनों नामों की भी राज्यसभा उम्मीदवारी के लिए चर्चा थी. आशुतोष जहां ऐसे पदों के लिए खुले तौर पर अपनी इच्छा कभी सार्वजनिक नहीं करते रहे हैं, वहीं कुमार विश्वास प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इच्छा भी जाहिर कर देते हैं और अपनी कविताओं के जरिये पार्टी के फैसलों पर सवाल भी उठा देते हैं.

आशुतोष दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय पार्टी के प्रभारी थे और उनके प्रभार में पार्टी ने दिल्ली की 70 में 67 विधानसभा सीटें हासिल की थी, ऐसे में माना जा रहा था कि अरविंद केजरीवाल उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पुरष्कृत कर सकते हैं. वे दिल्ली से पिछली बार लोकसभा चुनाव भी लड़े थे. वहीं, कुमार विश्वास पार्टी में रहते हुए भी थोड़े अलग-थलग दिखते रहे हैं. जबकि संजय सिंह हमेशा उस लाइन पर चलते दिखते रहे हैं तो अरविंद केजरीवाल तय करते हैं.

विकास प्रक्रिया की दौर से गुजर रही आम आदमी पार्टी में संजय सिंह मनीष सिसोदिया के बाद अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं. वे पंजाब विधानसभा में पार्टी के प्रभारी थे और पार्टी वहां 20 सीटें जीत कर मुख्य विपक्ष बनने में कामयाब रही और पहले ही चुनाव में वोट शेयर लगभग 24 प्रतिशत रहा. इस प्रदर्शन से संजय की पकड़ पार्टी में मजबूत हुई. इससे उलट दिल्ली में हुए चुनाव में आशुतोष प्रभारी जरूर थे, लेकिन वहां अरविंद केजरीवाल जैसा बड़ा चेहरा फ्रंट पर था और वह ब्रांड केजरीवाल की ही जीत थी.

आशुतोष को उम्मीदवार बनाये जाने से पार्टी में विभाजन की रेखा गहरी हो सकती थी, क्योंकि वे बाद के सालों में पार्टी से जुड़े जबकि संजय सिंह और कुमार विश्वास पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे हैं.उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर के रहने वाले संजयसिंहनेअपने गृह जिलेसे लेकर दिल्ली तक आरंभ से ही आंदोलनकिया है, जबकिदूसरेदावेदारों की ऐसीपृष्ठभूमिनहीं है. दूसरे दावेदार अपने पेश में जमने के बाद आंदोलन या राजनीति में आये. संजय सिंह ऐसे नाम हैं जिनका शायद कुमार विश्वास सीधा विरोध नहीं करें. हां यह अलग बात है कि उन्होंने उम्मीदवारों के नामों के एलान के बाद सच बोलने की सजा मिली है, जैसा बयान देकर अपनी इच्छा राज्यसभा के लिए जरूर जता दी है.

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