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Home National बड़ी मुश्किल से मिली है गुजरात में जीत, क्या कोई नया चेहरा बन सकता है सीएम

बड़ी मुश्किल से मिली है गुजरात में जीत, क्या कोई नया चेहरा बन सकता है सीएम

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बड़ी मुश्किल से मिली है गुजरात में जीत, क्या कोई नया चेहरा बन सकता है सीएम

बीजेपी खेमे में गुजरात में मुश्किल से हासिल की गयी जीत का जश्न खत्म हुआ. अब भाजपा में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चा जारी है. मीडिया में कई नामों को लेकर अटकलें लगायी जा रही है. इनमें कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का नाम भी शामिल है. गुजरात में मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर पर्यवेक्षक के तौर पर जेटली को नियुक्त किया. कई गुटों में बंट चुकी गुजरात भाजपा में कभी एक गुट अमित शाह का भी रहा करता था. समझा जा रहा है कि जेटली की नियुक्ति पर्यवेक्षक के रूप में इसलिए की गयी है क्योंकि वह वरिष्ठ हैं और प्रधानमंत्री मोदी के करीबी भी. इस लिहाज से वह शाह के फैसले पर भी वीटो लगाकर सीधे प्रधानमंत्री से संपर्क साध सकते हैं.वे गुजरात की जमीनी राजनीति में सीधे तौर पर सक्रिय नहीं हैं, इसलिए उनकी निरपेक्षता पर सवाल भी नहीं उठाया जा सकता है.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात भाजपा में छायी शून्यता
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात भाजपा में शून्यता छा गयी. आनंदी पटेल मुख्यमंत्री बनीं लेकिन उनमें प्रधानमंत्री के तरह करिश्माई छवि का आभाव था. आनंदीबेन के रहते पटेल आंदोलन भड़का. इस बीच आनंदीबेन मुख्यमंत्री पद से हटायी गयीं तो विजय रूपाणी मुख्यमंत्री बने. विजय रूपाणी भी कोई खास रंग जमा नहीं पाये. ऐसी परिस्थिति में गुजरात का अगला मुख्यमंत्री कौन बने. इस बात को लेकर भाजपा में गहन मंथन का दौर जारी है. क्या भाजपा योगी आदित्यनाथ जैसे आक्रामक शख्स की तलाश में है.
1. स्मृति ईरानी – कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के नाम को लेकर मीडिया में काफी चर्चा है. गुजरात से राज्यसभा सांसद स्मृति को लेकर यह भी कहा जा रहा था वह यूपी व दिल्ली में भी मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार रही हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मोदी और शाह की जोड़ी अब कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती है.
2. वजुभाई वाला – मोदी के बेहद करीबी वजुभाई वाला का नाम भी मुख्यमंत्री के दावेदारों में शामिल है. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री के तौर पर नामांकित किए जाने के बाद वजुभाई वाला ने वर्ष 2002 में मोदी के लिए यह सीट छोड़ दी थी. वजुभाई वाला कर्नाटक के राज्यपाल हैं और कई बार वित्त मंत्री रह चुके हैं लेकिन उनकी उम्र 70 साल की हो गयी है. यह बात उनके खिलाफ जाती है.
3.नितिन पटेल – पिछली बार मुख्यंत्री बनने से चूक गये नितिन पटेल इस बारसीएम बन सकते हैं. हालांकि वह पटेल बिरादरी से आते हैं और मोदी – शाह के कार्यकाल में जिन राज्यों का सीएम चुने गयेउसमें ज्यादातर वहां के राजनीतिक प्रभाव वाले समुदाय से नहीं आते हैं. हरियाणा में जाट की जगह गैर जाट को सीएम बनाया गया. वहीं झारखंड में आदिवासी के जगह गैर आदिवासी को सीएम बनाया गया.
4.विजयरूपाणी- भाजपा अध्यक्ष अमित शाह चुनावी मंचों से कई बार दुहरा चुके हैं कि विजय रूपाणी ही सीएम होंगे लेकिन भाजपा जितनी मुश्किल से चुनाव जीती है. अगर बीजेपी शीर्ष नेतृत्व वोटर्स के छिपे संकेत को पढ़े तो वे रूपाणी को सीएम के रूप में शायद ही फिर से चुनना चाहेगी.
5. नया चेहरा – गुजरात में कोई नया चेहरा भी सीएम हो सकता है लेकिन मोदी और शाह की जोड़ी ऐसे नाम पर दांव लगा सकती है जो युवा हो और युवा आबादी की उम्मीदों को समझ सके. यह नया चेहरा कोई भी हो सकता है.
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