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Home National यशवंत सिन्हा के बाद स्वदेशी जागरण मंच ने मोदी सरकार की नीतियों पर कसा तंज

यशवंत सिन्हा के बाद स्वदेशी जागरण मंच ने मोदी सरकार की नीतियों पर कसा तंज

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यशवंत सिन्हा के बाद स्वदेशी जागरण मंच ने मोदी सरकार की नीतियों पर कसा तंज

नयी दिल्ली : भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में लिखे एक लेख में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा है और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चिंता जाहिर की है. सिन्हा के इस लेख के बाद भाजपा बैकफुट में आ गयी है. पूर्व वित्त मंत्री के बाद स्वदेशी जागरण मंच ने भी अरुण जेटली पर हमला किया है. मंच के सह संयोजक ने कहा है कि मौजूदा आर्थिक नीतियों में कुछ चीजें हैं जिन्हें बदलना जरूरी है. रोजगार भारत में एक राजनीतिक नारा बन गया है. जीएसटी के कारण छोटे कारोबारी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. आगे उन्होंने कहा कि यशवंत सिन्हा की राय से मैं पूरी तरह से सहमत नहीं हूं लेकिन मौजूदा आर्थिक नीतियों में बदलाव की आवश्‍यकता है. सरकार को रोजगार पैदा करने की जरूरत है, वरना यह राजनीतिक नारा बना रहेगा.

नरेंद्र मोदी क्यों हैं यशवंत सिन्हा के निशाने पर

आपको बता दें कि अंग्रेजी अखबार में ‘आइ नीड टू स्पीक अप नाऊ’ (मुझे अब बोलना होगा) नामक शीर्षक वाले लेख में सिन्हा ने लिखा है, ‘वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था की जो दुर्गति की है, उस पर अगर मैं अब भी चुप रहा, तो राष्ट्रीय कर्तव्य निभाने में विफल रहूंगा. मुझे मालूम है कि जो मैं कहने जा रहा हूं, भाजपा के ज्यादातर लोगों की यही राय है, पर वे डर के कारण बोल नहीं पा रहे हैं.’ सिन्हा ने लिखा है कि इस सरकार में अरुण जेटली सबसे माहिर समझे जाते हैं. यह 2014 लोकसभा चुनावों से पहले तय था कि वह नयी सरकार में वित्त मंत्री होंगे. अमृतसर से लोकसभा चुनाव हारना भी उनकी राह का रोड़ा नहीं बना. याद होगा कि ऐसी ही परिस्थितियों में अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में जसवंत सिंह और प्रमोद महाजन को मंत्री बनाने से इनकार कर दिया था, जबकि वे दोनों उनके बेहद करीबी थे. जेटली की अपरिहार्यता उस समय लक्षित हुई, जब प्रधानमंत्री ने उन्हें न सिर्फ वित्त मंत्रालय, बल्कि रक्षा और कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय भी सौंप दिया.

दिग्गज भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने किया अरुण जेटली पर हमला, नोटबंदी को भी कोसा

उन्होंने कहा कि वह भी वित्त मंत्री रहे हैं और जानते हैं कि कितनी मेहनत करनी पड़ती है. ऐसे में जेटली के कंधे पर चार मंत्रालयों की जिम्मेदारी देना भी ठीक नहीं था. सिन्हा ने लिखा है कि नोटबंदी एक बड़ी आर्थिक आपदा साबित हुई है. ठीक तरीके से सोची न गयी और घटिया तरीके से लागू करने के कारण जीएसटी ने कारोबार जगत में उथल-पुथल मचा दी है. दूसरी तिमाही में भी अर्थव्यवस्था की विकास दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर 5.7 पर आ गयी, जो तीन साल में सबसे कम है. सरकार के प्रवक्ता कह रहे हैं कि इस मंदी के लिए नोटबंदी जिम्मेदार नहीं है. वे सही हैं. मंदी काफी पहले से शुरू हो गयी थी, नोटबंदी ने केवल आग में घी डालने का काम किया है.

अगले लोकसभा चुनाव तक कोई उम्मीद नहीं

सिन्हा ने लिखा है कि प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि उन्होंने गरीबी को काफी करीब से देखा है, लेकिन ऐसा लगता है कि उनके वित्त मंत्री ओवर-टाइम काम कर रहे हैं, जिससे वह सभी भारतीयों को गरीबी को काफी नजदीक से दिखा सकें.’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री चिंतित हैं. विकास को रफ्तार देने के लिए वित्त मंत्री ने पैकेज देने का वादा किया है. हम सभी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. 90 के दशक और 2000 के समय में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में करीब चार साल का वक्त लगा था. अगले लोकसभा चुनाव तक अर्थव्यवस्था में रफ्तार की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

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