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पत्रकार लंकेश हत्याकांड की जांच के लिए एसआइटी गठित, लोगों में आक्रोश

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पत्रकार लंकेश हत्याकांड की जांच के लिए एसआइटी गठित, लोगों में आक्रोश

बेंगलुरु/नयी दिल्ली : बेंगलुरु की पत्रकार गौरी लंकेश की नृशंस हत्या को लेकर समूचे देश खासकर पत्रकार बिरादरी में आक्रोश है. कर्नाटक सरकार ने इस मामले की जांच के लिए बुधवार को एक पुलिस महानिरीक्षक के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया. गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में पत्रकारों और सामाजिक समूहों ने बुधवार को दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और कई दूसरे शहरों में प्रदर्शन किया. राजनीतिक दलों ने भी घटना की निंदा की. गौरी लंकेश का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, गृह मंत्री रामालिंगा रेड्डी, जदएस विधायक बीजेड जमीर अहमद खान, अभिनेता प्रकाश राज, रंगमंच की हस्तियां, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी की अगुवाई में एक एसआइटी के गठन का ऐलान किया और कहा कि सीबीआइ द्वारा जांच कराने को लेकर उनकी सरकार के ‘खुले विचार’ हैं. राज्य के गृह मंत्री रामालिंगा रेड्डी ने ऐलान किया कि एसआइटी का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (खुफिया) बीके सिंह करेंगे. 55 वर्षीय कन्नड पत्रकार की मंगलवार रात यहां उनके आवास पर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. वह वाम पंथ की तरफ झुकाव और हिंदुत्व की राजनीति के खिलाफ स्पष्टवादी विचारों के लिए जानी जाती थीं. गौरी अपनी कार से घर वापस लौटीं और गेट खोल रही थीं, तभी मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों ने उनपर अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिनमें से दो उनके सीने में और एक माथे पर लगी और उनकी वहीं मौत हो गयी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआइटी के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गयी है, लेकिन उससे कहा गया है कि तत्काल काम शुरू करे. जांच अधिकारियों की उम्मीद फिलहाल गौरी लंकेश के घर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पर टिकी है. कैमरे में नजर आ रहा है कि हेलमेट पहने हुए एक व्यक्ति गौरी के मकान के गेट के अंदर जा रहा है और गोलीबारी कर रहा है. पत्रकारों ने दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में विरोध प्रदर्शन किया. पत्रकारों ने गौरी के लिए इंसाफ की मांग की और असहमति की आवाजों को ‘दबाने’ की कोशिश कर रही ‘ताकतों ‘ से डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया.

लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुरता ने गौरी की हत्या को भारतीय मीडिया के इतिहास में एक ‘निर्णायक क्षण’ करार दिया. उन्होंने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि खुली सोच की गुंजाइश कम होती जा रही है. वे ऐसे लोगों को चुप कराना चाहते हैं जो सत्ता का सामना सच से कराना चाहते हैं. हम चुप नहीं रह सकते, क्योंकि वे तो यही चाहते हैं. बिल्कुल चुप न रहें. यह उनकी कामयाबी होगी.’ पत्रकार की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार से वारदात के बारे में रिपोर्ट मांगी है.

गृह सचिव राजीव गौबा ने बुधवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह के निर्देश पर कर्नाटक सरकार से इस मामले की रिपोर्ट तलब की है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार से इस घटना की तथ्यवार जानकारी और वारदात में शामिल लोगों को पकड़ने के वास्ते अब तक की गयी कार्रवाई के बारे में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है.

पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की राजनीतिक दलों ने भी कड़ी निंदा की है. कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा को घेरा, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने इस घटना के तार भाजपा या उसके लोगों से कथित तौर पर जुड़े होने के आरोपों को ‘गैरजिम्मेदाराना, निराधार और फर्जी’ करार दिया. सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने भी गौरी लंकेश की हत्या की निंदा की और उम्मीद जतायी कि इस मामले में त्वरित जांच होगी और उन्हें न्याय मिलेगा.

पत्रकार की हत्या की भर्त्सना करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि यह घटना इस बात की भयावह याद दिलाती है कि ‘असहिष्णुता और कट्टरता हमारे समाज में सिर उठा रही है.’ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने संवाददाताओं से कहा, ‘सच को कभी दबाया नहीं जा सकता. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा सच को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन भारत में यह नहीं हो सकता. ‘इस मुद्दे पर मोदी की चुप्पी के बारे में पूछने पर राहुल ने कहा, ‘पूरी विचारधारा ही आवाजों को चुप करा देने की है.’ केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोनिया और राहुल के बयानों को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री के खिलाफ ‘फर्जी’ आरोप लगाना उनकी पार्टी के प्रति अन्याय और लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है. गडकरी ने कहा, ‘मौजूदा सरकार, भाजपा या इसके किसी संगठन का पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से कोई सबंध नहीं है.’

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