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प्रधानमंत्री नितिन गडकरी को ही क्यों देना चाहते हैं रेलवे का जिम्मा ?

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प्रधानमंत्री नितिन गडकरी को ही क्यों देना चाहते हैं रेलवे का जिम्मा ?

कैबिनेट में फेरबदल को लेकर मीडिया में कई तरह की अटकलें लगायी जा रही है. बताया जा रहा है कि नितिन गडकरी को पथ – परिवहन के साथ रेल मंत्रालय का जिम्मा भी सौंपा जा सकता है. भाजपा और संघ को नजदीक से जानने वाले लोगों की राय में नितिन गडकरी संघ के भरोसमंद हैं और प्रधानमंत्री उनके कामकाज से बेहद खुश है. नितिन गडकरी फिलहाल सड़क परिवहन, राजमार्ग व जहाजरानी मंत्रालय संभाल रहे हैं. अब अगर उन्हें रेल मंत्रालय सौंपा जाता है तो उनके जिम्मे केंद्र का दो – दो अहम मंत्रालय होगा.गौरतलब है कि लगातार हो रहे रेल हादसे से व्यथित सुरेश प्रभु ने प्रधानमंत्री के समक्ष इस्तीफे की पेशकश की थी. प्रधानमंत्री ने उन्हें इंतजार करने को कहा था.

प्रधानमंत्री मोदी नितिन गडकरी के जिन दो गुणों से प्रभावित हैं. उनमें गडकरी का किसी प्रोजेक्ट में काम को समयबद्ध तरीके से पूरा करना और अफसरों से काम करवाने का जबर्दस्त स्किल भी शामिल है. बताया जा रहा है कि हाल ही में आश्विवनी लोहानी को रेलवे बोर्ड चेयरमैन नियुक्त किया गया है. लोहानी को एयर इंडिया उबारने का श्रेय जाता है. आश्विनी लोहानी की नियुक्ति के बाद मोदी मजबूत ऑफिसर के जिम्मे रेलवे को सौंप सकते हैं, जो नितिन गडकरी के निगरानी में काम करते रहेंगे. लोहानी को रेलवे के कामकाज का लंबा अनुभव रहा है.
पथ – परिवहन मंत्री संभाल रहे नितिन गडकरी को इंफ्रास्ट्रक्चर की अच्छी समझ है. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ को पूरा कर बेहतरीन कामकाज का प्रदर्शन दिया था. लेकिन उन्हें पहली बार पहचान ‘मुंबई – पुणे एक्सप्रेस’ हाइवे से मिली. मुंबई और पुणे महाराष्ट्र की दो सबसे बड़ी शहर है लेकिन दोनों शहरों के बीच कनेक्टिविटी की समस्या थी. 95 किमी लंबे इस हाइवे ने मुंबई और पुणे के बीच की दूरी की समय सीमा दो घंटे कम कर दी.
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित, पोर्ट, वाटर वे सहित तमाम तरह के काम में तेजी लाने का श्रेय भी उन्हें मिला. गड़करी एक नेता के साथ – साथ उद्योगपत्ति भी है और अपने कामकाज के तकनीकी और व्यवसायिक पक्ष की हर बारीकी को समझते हैं. वह एक बायो-डीजल पंप, एक चीनी मिल, एक लाख 20 हजार लीटर क्षमता वाले इथानॉल ब्लेन्डिंग संयत्र, 26 मेगावाट की क्षमता वाले बिजली संयंत्र, सोयाबीन संयंत्र और को जनरेशन ऊर्जा संयंत्र के संचालक है. हालांकि विपक्षी दलों ने उन पर फर्जी कंपनियां चलाने का आरोप भी लगाया था.

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