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भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं श्रीश्री 108 वैष्णवी दुर्गा माता

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भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं श्रीश्री 108 वैष्णवी दुर्गा माता

ऋताम्बर कुमार सिंह, झाझा

नगर स्थित श्रीश्री 108 वैष्णवी दुर्गा माता श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती हैं. जो श्रद्धालु सच्चे मन से कामना करते हैं माता उनकी सारी मनोकामना पूर्ण होती हैं. नवरात्र के पहले दिन से विजयादशमी तक सुबह से लेकर शाम तक सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं, संध्या आरती में भी शामिल होते हैं. पूजा समिति के अध्यक्ष प्रभाष बंका, साधु केशरी, सूरज कुमार समेत अन्य लोगों ने बताया कि वर्षों पूर्व इस स्थल पर एक विशाल बरगद पेड़ था. स्थानीय लोगों के द्वारा यहां मंदिर निर्माण कर माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना प्रारंभ किया गया. माता रानी की कृपा व प्रेरणा से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. खास कर नवरात्र के अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां जुटते हैं. पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि इस बार पंडाल के बाहर व अंदर की सजा अद्भुत है. इन पंडाल को सजाने के लिए बिहार, झारखंड ,पश्चिम बंगाल के अलावा कई जगहों के कारीगर आये हुए हैं, जो लगातार एक विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि नवरात्र के अवसर पर प्रत्येक वर्ष कुछ नया करने का प्रयास करते हैं. पिछले वर्ष जिला प्रशासन के द्वारा वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति को प्रथम पुरस्कार दिया गया है. पूजा समिति को पूर्ण विश्वास है कि इस वर्ष भी वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति को ही प्रथम स्थान प्राप्त हो सकता है.

55 वर्षों से प्रतिमा का निर्माण कर रहे मुंगेर के महादेव पंडित

महादेव पंडित अपने परिवार के सदस्यों के साथ पूजा के ठीक एक माह पहले झाझा आ जाते हैं एवं यहीं रहकर प्रत्येक दिन मिट्टी के मूर्ति का निर्माण करते हैं. इस दौरान साजो- शृंगार का सामान भी वे लोग खुद लाते हैं. पूरे मनोयोग एवं भक्ति भाव से लीन पंडित परिवार मूर्ति का निर्माण करते हैं. इस दौरान वे लोग पूरी निष्ठा के साथ झाझा में ही बास करते हैं और सप्तमी के ठीक एक दिन पूर्व मंदिर निर्माण को फाइनल टच देते है.

कोलकाता के पंडित करते हैं पूजा

इस मंदिर में कोलकाता के पंडित द्वारा नवरात्र के दौरान पूजा- अर्चना की जाती है. एक विशेष विधि-विधान के साथ पूजा- अर्चना करने के अलावा कई तरह की पुरानी कथाओं के साथ पूजा को संपन्न की जाती है .यही कारण है कि इस मंदिर की महत्ता दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है एवं संध्या आरती के समय अत्यधिक भीड़ भी हो जा रही है. इस दौरान पुजारियों द्वारा विशेष पूजा- अर्चना भी की जाती है. इस मंदिर की सबसे खासियत यही है कि पूरे नवरात्र के दौरान प्रत्येक दिन मां का गर्भगृह को फूलों से सजाया जाता है. पूरे दिन इस गर्भ गृह में पूजा होती है एवं फुल बदला जाता है. यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है. सबसे खास बात यह है कि नवरात्र के शुरू होने के दिन से मूर्ति विसर्जन तक यह कार्यक्रम जारी रहता है.

मंदिर का कार्यक्रम

29 सितंबर यानि सोमवार को सप्तमी पूजन एवं मिट्टी से निर्मित मां दुर्गा की प्राण प्रतिष्ठा की जायेगी. 30 सितंबर यानि मंगलवार को महाअष्टमी पूजन, संध्या जागरण एवं शाम 6:00 बजे के बाद प्रसाद का वितरण होगी. एक अक्टूबर यानि बुधवार को नवमी पूजन, हवन एवं शाम 6:00 बजे के बाद प्रसाद का वितरण होगा. दो अक्टूबर यानि गुरुवार को विजयादशमी पूजन, कलश विसर्जन, प्रसाद वितरण, शोभायात्रा एवं प्रतिमा का विसर्जन होगा. पूजा के बाबत संयोजक प्रभाष बंका, भवनेश त्रिवेदी, अनिल बरनबाल, सूरज कुमार समेत कई लोगों ने बताया कि पूरे मंदिर में सीसीटीवी कैमरा के अलावा सुरक्षा के दृष्टिकोण से कई वालंटियर भी लगाये जाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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